गतांक से आगे : भाग – 6/15 रौरव नरक

पुत्र सुमति की पारलौकिक बातें सुनकर पिता ने कहा कि हे पुत्र! मृत्यु के पश्चात किन किन पापों के कारण वह रौरव नरक के कष्ट भोगता है। यह रौरव नरक कैसा है? इसका स्वरूप क्या है ? पुत्र इसे विस्तार से बताओ। पिता की बात सुनकर पुत्र सुमति ने इस प्रकार बताना शुरू किया।
उसने कहा कि दाह संस्कार के बाद भौतिक शरीर जलकर राख हो जाता है। किंतु उसी समय उसका कर्मजनित शरीर हूबहू पहले शरीर जैसी आकृति और रूप में जन्म ले लेता हैं। यही कर्मजनित शरीर यमदूतों के साथ दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करता हुआ कुछ समय बाद यमनगरी संयमनीपुरी पहुंच जाता है। उसी दौरान उसके सत्कर्मो और पापों का हिसाब भी तैयार हो जाता है।
उसने पिता को आगे बताया कि जो पुरुष पृथ्वी पर झूठ बोलता है, झूठ बोलकर प्राणियों को अनावश्यक पीड़ित करता है, झूठी गवाही देकर प्राणियों को मृत्यु दिलवाता है, झूठ का सहारा लेकर साधु संतों को धर्मभ्रष्ट करता है, झूठ बोलकर धन का अपहरण करता है, ऐसे पापियों को तप्त रौरव नरक में डाल दिया जाता है।
यह रौरव नरक दो हजार योजन लम्बा और इतना ही चौड़ा घुटनों तक गहरा होता है। इस गड्ढे में अत्यंत तप्त अंगारे हरदम दहकते रहते हैं। यह अत्यंत ही तप्त होता है। उपरोक्त पाप कर्मकर्ता पापी के कर्मजनित शरीर को इसी तप्त रौरव नरक में धकेल दिया जाता। इसमें गिरने के बाद पापी भयंकर जलन से पीड़ित होकर त्राहि त्राहि चिल्लाता हुआ इधर उधर भागता रहता है। उसके घुटने तक पैर जलकर राख हो जाते हैं।
ऐसी भयंकर त्रास उस प्राणी को बहुत समय तक दी जाती है। उसके पैर घुटनो तक जलने के बाद पुनः पूर्व स्थिति में आ जाते हैं ताकि उसे कष्ट देने बार बार उस तप्त कुंड में गिराया जा सके। यह क्रिया अनन्त काल तक दुहरायी जाती है। फिर उसे अन्य पापकर्मों के भोग हेतु दूसरे नरकों की ओर ले जाया जाता है।
ऐसे पापियों की पृथ्वी पर उनकी जो संतति है और यदि वह मृतात्मा हेतु दान, धर्म, अन्नदान और अक्षम प्राणियों को भोजन करवाता है तो प्रेतात्मा को इन कष्टों से जल्दी ही छुटकारा प्राप्त हो जाता है।
धर्मात्मा सुमति की बात से संतुष्ट होकर पिता ने शुभाशीष देते हुए महारौरव नरक के विषय में बताने हेतु पुत्र से आग्रह किया!!..क्रमशः
  : आर.के.शुक्ला

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