मेरा शहर मेरी जिम्मेदारी – श्रीमती ममता

दिनांक 2/9 से गणपति उत्सव ,जैन पर्व,और इसी बीच मोहर्रम और डोल ग्यारस भी मनाया जाएगा। सभी लोग अपनी अपनी श्रद्धा से और विस्तृत रूप अपने अपने त्यौहारों को मनाते है,तथा विभिन्न स्थानों पर पंडाल लगाकर भंडारे की व्यवस्था भी की जाती है। जिसमे लोगो द्वारा डिस्पोजल ,दोने और पतले रास्ते मे ही फेंक दिए जाते है।
यहाँ मेरा एक सुझाव है। हमारे पर्व को मनाते समय हमें इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि ये शहर हमारा भी हैंऔर इसको स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी हमारी भी है ,,,। लोगो द्वारा जो पत्तल या कभी कभी खाना ही फेक दिया जाता है ,जो पैरों में आता है और नगरपालिका द्वारा उसकी सफाई तो अगली सुबह ही होंगी अतः क्यों न हम खाकर निर्धारित स्थान पर उसे फेके। इसके लिए सभी समितियों के लोगो की एक बैठक प्रशासन द्वारा बुलाकर उन्हें आवश्यक निर्देश दिए जाने चाहिए ,,,और समिति द्वारा अपने वॉलिंटियर्स तैयार किये जाने चाहिए । वैसे समितियों द्वारा वलिंटयर्स यातायात सुचारू रूप से करवाने बनाये जातेंहै,,,पर एक सुधार पर और ध्यान देना चाहिए कि ये वैलिंटियर्स भंडारा में आने वाले लोगो से कहे कि ये वही ख़ाकर निर्धारित स्थान में पत्तल रखे ,बच्चों को देते समय ध्यान रखे कि फिके न। इस तरह हम अपने मण्डला में स्वच्छता रख,,अपने आराध्य की सही मायने में आराधना करेगे । पत्तल और दोने का उपयोग करे ,,डिस्पोजल का वहिष्कार करे। हमारे छोटे छोटे से कदम शहर में सफाई की क्रांति ला सकते है ,,प्रशासन के साथ जनता जनार्दन भी अपनी जिम्मेदारी निभाये ,,ये सोच कर की ,,मेरा शहर मेरी जिम्मेदारीसभी को बहुत शुभकामनाएं ..

ममता चौरसिया ( महिला अध्यक्ष – चौरासिया समाज )

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