नेत्र रोग के 85 बच्चों की होगी सर्जरी

सभी बच्चें अब अन्य बच्चों की तरह देख सकेंगे

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की योजना राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों को नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाएं देने का प्रावधान है। जिससे कि पीडि़त बच्चे निरोगी हो और एक स्वस्थ्य समाज एवं उज्जवल भविष्य का निर्माण हो। इसी उद्देश्य से आरबीएसके अंतर्गत जन्मजात मोतियाबिंद और दृष्टिबाधित बच्चों को चिन्हित कर उनकी सर्जरी कराई जा रही है। जिससे बच्चें अन्य बच्चों की तरह देख सके। बता दे कि आरबीएसके टीम द्वारा 85 बच्चों को चिन्हित किया गया था। जिनका जांच परीक्षण राहत-2 में कराया गया। जिसके बाद इनकी सर्जरी जिला चिकित्सालय में नेत्र सर्जन डॉ. तरूण अहिरवार एवं उनकी टीम नेत्र सहायक श्री चंद्रवंशी एवं अनिल भोयर द्वारा किया जा रहा है।
नेत्र सर्जन डॉ. तरूण अहिरवार ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत 85 बच्चों को आंख से संबंधित विभिन्न समस्यायें है। जिनका जांच परीक्षण किया जा रहा है। जिसके बाद इन बच्चों की सर्जरी की जाएगी। जिसके बाद बच्चे अन्य बच्चों की तरह देख सकेंगे। इन बच्चों में 27 को केटरेक, 04 कोरनिया, 20 एक्थोलोप्लास्टि, 01 पैड्स, 01 टोसिस एवं 32 बच्चे तिरछेपन के चिन्हित किये गए है। इन बच्चों का जांच परीक्षण शुरू हो गया है। अब इन बच्चों का सोमवार से एक दिन में पांच-पांच बच्चों की सर्जरी की जाएगी। नेत्र सहायक चंद्रवंशी जी एवं अनिल भोयर ने बताया कि चिन्हित बच्चों एनेथिसिया देकर ऑपरेट किया जाएगा।  जिनमें 10 वर्ष से ऊपर के बच्चों को लोकल एनेथिसिया और उससे छोटे बच्चों को जनरल एनेथिसिया दिया जाएगा। चिन्हित बच्चों का अगले सप्ताह से ऑपरेशन किया जाएगा।
जिला शीघ्र हस्तक्षेप प्रबंधक राजाराम चक्रवर्ती ने बताया कि कुछ नवजात शिशुओं में जन्मजात विकार हो जाते है। उनमें से अधिकांश विकार ठीक हो सकते है, यदि उनका समय पर उपचार और चिकित्सा सेवा का लाभ मिल जाए लेकिन ग्रामीण क्षेत्र एवं शहरी क्षेत्रों में जागरूकता के आभाव के कारण बच्चो में आए विकार को पहचान नहीं पाते और आगे चलकर ऐसे बच्चे शारीरिक और मानसिक रूप से विकृत हो जाते है। जिससे परिवार पर बोझ बनकर अंधकारमय जीवन जीने मजबूर हो जाते है। इसके लिये सरकार द्वारा हर जिले में ब्लाक स्तर पर मोबाइल हेल्थ टीम आरबीएसके का गठन किया गया है जो सरकारी और अर्धसरकारी विधायलयों एवं आँगनवाड़ी केन्द्रों पर जाकर पंजीकृत बच्चो का स्वास्थ्य परीक्षण करते है। यहां अस्वस्थ्य बच्चो को चिन्हित करके उन्हे नि:शुल्क उच्च चिकित्सा सेवाओं के लिये सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, जिला चिकित्सालय और मेडिकल कालेज में ले जाया जाता है। जहाँ डीईआईसी के माध्यम से इन बच्चो को संबन्धित विभाग से नि:शुल्क उपचार दिलाया जाता है।
सीएमएचओ डॉ. श्रीनाथ सिंह ने बताया कि 0 से 18 वर्ष के बच्चों को जिला चिकित्सालय में स्थित जिला शीघ्र पहचान एवं हस्तक्षेप केन्द्र में उन बच्चों को स्वास्थ्य सुविधायें उपलब्ध है जो मानसिक एवं विकृत रूप से स्वस्थ नहीं होते। जिले में जागरूकता के अभाव के चलते ऐसे बच्चों की पहचान नहीं हो पाती है। जिससे बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो जाता है। ऐसे ही बच्चों के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले हर ब्लाक में आरबीएसके टीम मौजूद है। जिससे ऐसे बच्चों को चिन्हित कर उनका उपचार कराया जा सके।  
एक बच्ची की हुई सर्जरी:
बता दे कि चिन्हित बच्चों में झुरकी पौंडी निवासी रितु नंदा 12 वर्ष को दोनों आंखों में मोतियाबिंद था। जिसका पिछले सप्ताह एक आंख के मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया गया। जिसके बाद उसकी एक आंख की रोशनी वापस आ गई। दूसरी आंख का ऑपरेशन बुधवार 4 दिसंबर को किया गया है। जिसके बाद अब रितु दोनों आंखों से देख सकेगी। इसे देखकर उसकी मां अब बहुत खुश है।

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