मीडिया टुडे – समाचार

पटवारी भर्ती में चयनित अभ्यर्थियों का दस्तावेज सत्यापन 30 से

                                             अधीक्षक भू-अभिलेख से प्राप्त जानकारी के अनुसार पटवारी भर्ती परीक्षा 2017 के तहत् मंडला जिले के लिए चयनित अभ्यर्थियों का दस्तावेज सत्यापन एवं द्वितीय कांऊसलिंग 30 दिसम्बर से होगी। दस्तावेजों का सत्यापन 30 दिसम्बर  को दोपहर 10ः30 बजे से कार्यालय अधीक्षक भू-अभिलेख में किया जायेगा। चयनित अभ्यर्थी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से जारी स्नातक उपाधि की डिग्री, आयु, जन्म, मूल निवास, जाति, निःशक्तता, भूतपूर्व सैनिक आदि से संबंधित प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करेंगे। अभ्यर्थी निर्धारित प्रारूप में नोटरी द्वारा सत्यापित शपथ-पत्र तथा समस्त मूल दस्तावेजों की दो-दो छायाप्रति सहित उपस्थित होंगे।

ऋण प्रकरणों के निराकरण के लिए तिथिवार कार्यक्रम जारी

बैंक एवं जनपद स्तर पर लगेंगे शिविर

                                             किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जय किसान फसल ऋण माफी योजना अंतर्गत पोर्टल पर प्राप्त सूची के अनुसार पिंक-1 एवं पिंक-2 फार्मों के दावाकर्ता हितग्राहियों के प्रकरणों का निराकरण किया जाना है जिसके लिए बैंकवार एवं तिथिवार कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। निर्धारित कार्यक्रम के तहत् जिला सहकारी केन्द्रीय मर्यादित मंडला के समस्त बैंक शाखाओं में 26, 27, 28 एवं 30 दिसम्बर को जिले की समस्त ग्रामीण बैंक शाखाओं में 26 एवं 27 दिसम्बर को एवं अन्य राष्ट्रीय बैंकों के समस्त बैंक शाखाओं में 26, 27 एवं 30 को शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। दावाकर्ता हितग्राही निर्धारित तारीखों पर आवश्यक दस्तावेज सहित ऋणदाता बैंक शाखाओं में उपस्थित होकर अपने प्रकरण का निराकरण करा सकते हैं।

उक्त तारीखों में यदि बैंक स्तर पर दावाकर्ता के प्रकरण का निराकरण नहीं हो पाता है तब अलग से जनपद पंचायत स्तर पर 3 जनवरी को जनपद पंचायत निवास, नारायणगंज तथा बीजाडांडी में, 4 जनवरी को जनपद पंचायत घुघरी, मोहगांव तथा मवई एवं 6 जनवरी को जनपद पंचायत मंडला, नैनपुर तथा बिछिया में उपस्थित होकर अपने प्रकरण का निराकरण करा सकते हैं। उपसंचालक कृषि विभाग ने सभी किसानों से उक्त निर्धारित दिनांक में उपस्थित होकर अपने ऋणमाफी प्रकरणों का निराकरण कराने की अपील की है।

30 को घुघरी एवं 31 को मवई परिक्षेत्र में अनुभूति शिविर

                                             प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी मध्यप्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड भोपाल एवं वन विभाग के संयुक्त तत्वाधान में पूर्व सामान्य वनमंडल मंडला के अंतर्गत आने वाले सभी परिक्षेत्रों में 15 दिसम्बर से 15 जनवरी तक अनुभूति कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। अनुभूति कार्यक्रम के अंतर्गत स्कूली विद्यार्थियों में प्रकृति एवं पर्यावरण के संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता विकसित किए जाने के उद्देश्य से प्रशिक्षण सह जागरूकता शिविरों का भी आयोजन किया जा रहा है। वन मंडलाधिकारी ने बताया कि अनुभूति कार्यक्रम 2019-20 के तहत् पूर्व सामान्य वनमंडल के समस्त 6 परिक्षेत्रों में 2-2 केम्प अलग-अलग तिथियों में आयोजित किए जायेंगे। प्रत्येक केम्प के लिए वन परिक्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले समस्त शासकीय विद्यालय, आश्रम एवं छात्रावासों के विद्यार्थियों को सम्मिलित किया गया है। प्रति केम्प के लिए 120 विद्यार्थियों के चयन के आधार 1440 विद्यार्थियों को सम्मिलित किया गया है। शिविर के दौरान विद्यार्थियों को प्रशिक्षित मास्टर टेªनरों एवं वन अधिकारियों के द्वारा पर्यावरण संरक्षण की जानकारी, पारिस्थितिक तंत्र के घटकों की व्याख्या, जैव विविधता, पक्षी दर्शन, वन औषधि तथा वन प्रबंधन की जानकारी दी जायेगी।

शिविरों का तिथिवार कार्यक्रम

                                             पूर्व सामान्य वनमंडल द्वारा अनुभूति कार्यक्रम के अंतर्गत 15 जनवरी तक शिविरों का आयोजन किया जायेगा। जारी कार्यक्रम के तहत् 30 दिसम्बर को परिक्षेत्र घुघरी के अंतर्गत वनकक्ष क्रमांक 999एरी में, 31 दिसम्बर को मवई परिक्षेत्र के अंतर्गत साजालगान फेन अभ्यारण्य में, 2 जनवरी को जगमंडल परिक्षेत्र के अंतर्गत मटियारी डेम में, 3 जनवरी को बिछिया परिक्षेत्र के अंतर्गत खेरांकी सिझौरा में, 4 जनवरी को घुघरी परिक्षेत्र के अंतर्गत वनकक्ष क्रमांक 1488 डोंगरमंडला में, 6 जनवरी को मोहगांव परिक्षेत्र के अंतर्गत कंचनगांव नर्सरी में, 7 जनवरी को जगमंडल परिक्षेत्र के अंतर्गत मोतीमहल रामनगर में, 8 जनवरी को बिछिया परिक्षेत्र के अंतर्गत शंकरघाट कक्ष क्रमांक 1999 में, 9 जनवरी को मोहगांव परिक्षेत्र के अंतर्गत चुभावल वन विश्रामगृह एवं पड़ादर वन में, 10 जनवरी को मोतीनाला परिक्षेत्र के अंतर्गत फेन अभ्यारण्य में तथा 13 जनवरी को मवई परिक्षेत्र के अंतर्गत वनक्षेत्र डंगोनाफॉल में प्रशिक्षणसह जागरूकता शिविर का आयोजन किया जायेगा।

जिला स्तरीय स्टेयरिंग समिति की बैठक आज

                                             कलेक्टर कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला स्तरीय स्टेयरिंग कमेटी की बैठक 23 दिसम्बर को आयोजित की गई है। इस बैठक का आयोजन समय सीमा बैठक के पश्चात् किया जायेगा। कलेक्टर ने सभी संबंधित सदस्यों को बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के लिए निर्देशित किया है।

कल मनाया जायेगा राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस

               कलेक्टर डॉ. जगदीश चन्द्र जटिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी 24 दिसम्बर को राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम विकासखण्ड मुख्यालय बिछिया के जनपद पंचायत सभागार में दोपहर 2 बजे से निर्धारित किया गया है जिसमें उपभोक्ताओं को उनके हित के संबंध में जानकारी प्रदान की जायेगी। साथ ही संबंधित विभागीय अधिकारी द्वारा उपभोक्ताओं की समस्याओं का निराकरण भी किया जायेगा। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को उपभोक्ता हितों से संबंधित विभागीय जानकारी के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए।

राजस्व अधिकारियों की बैठक 24 को

                                             अपर कलेक्टर से प्राप्त जानकारी के अनुसार राजस्व अधिकारियों की बैठक 24 दिसम्बर को आयोजित की गई है। बैठक का आयोजन कलेक्ट्रªेट सभाकक्ष में दोपहर 1 बजे से किया गया है। बैठक में राजस्व से संबंधित सभी विषयों पर विस्तार से चर्चा की जायेगी।

पाले से फसल की सुरक्षा के लिए एडवाईजरी जारी

                                             उपसंचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग ने शीत ऋतु में पड़ने वाले पाले से फसल की सुरक्षा के लिए एडवाईजरी जारी कर दी है। जारी सुरक्षा उपाय के अंतर्गत रात में पाला पड़ने की संभावना होने पर रात 12 बजे से 2 बजे के आसपास खेत की उत्तरी पश्चिमी दिशा से आने वाली ठंडी हवा की दिशा में खेतों के किनारे पर बोई हुई फसल के आसपास मेढ़ों पर रात्रि में कूड़ा-कचरा, पैरा, घास, फूस जलाकर धुआं करना चाहिए, ताकि खेत में धुऐं के साथ-साथ वातावरण में गर्मी आ जाए। धुआं करने के लिए उपरोक्त पदार्थों के साथ क्रूड ऑयल का प्रयोग कर सकते हैं। इस विधि से 4 डिग्री सेल्सियस तापमान आसानी से बढ़ाया जा सकता है। पौधशाला के पौधों एव क्षेत्र वाले उद्यानों एवं नकदी फसल टाट को पौलीथीन अथवा धान की पूआल से ढक दें। वायुरोधी टाटियांे को हवा आने वाली दिशा की तरफ से बांधकर क्यारियों के किनारे पर लगाऐं तथा दिन में पुनः हटा दें। पाला पड़ने की संभावना होने पर खेत में सिंचाई करना चाहिए। नमी युक्त जमीन में काफी देर तक गर्मी रहती है तथा भूमि का तापमान कम नहीं होता। इस प्रकार पर्याप्त नमी नहीं होने पर शीत लहर व पाले से नुकसान की संभावना कम रहेगी। आवश्यक हो तो आलू व सरसों के खेत की भी सिंचाई कर दें। सर्दी में फसल की सिंचाई करने से 0.5 डिग्री से 2 डिग्री सेल्सियस तापमान बढ़ जाता है। दलहनी फसलों को पाले से बचाने के लिए बगल वाली खेत की सिंचाई कर दें। दलहनी फसलों की सीधे सिंचाई करने से फसल गिर सकती है। अगर फूल व पत्तियां गिर रही हैं तो किसान कल्याण तथा कृषि विभाग मंडला एवं कृषि विज्ञान केन्द्र मंडला के अधिकारियों से संपर्क करें एवं उनकी पत्तियों का सेंपल भी दिखाएं।

 सामान्यतः पाले से फसलों को बचाने का आसान तरीका यही है। इस मौसम में गेहूं की फसल को सिंचाई की जरूरत है तो देर न करें, सिंचाई तुरंत करें। जिन दिनों पाला पड़ने की संभावना हो उन दिनों में फसल पर गंधक के घोल के 0.1 प्रतिशत घोल का छिड़काव करना चाहिए इसके लिए 1 लीटर गंधक के घोल को 100 लीटर पानी में घोलकर 1 हेक्टेयर क्षेत्र में स्प्रेयर से छिड़काव का 2 सप्ताह रहना है, यदि इस अवधि के बाद भी शीत लहर पाले की संभावना बनी रही तो सल्फर का छिड़काव 15-15 दिनों के अंतराल में दोहराते रहें। दीर्घकालीन उपाय के अंतर्गत फसलों को ठंड से बचाने के लिए खेत की उत्तरी पश्चिमी मेड़ों पर बीच-बीच में उचित स्थानों पर वायु अवरोधक पेड़ जैसे- शहतूत, शीशम, बबूल, जामुन आदि के पेड़ लगा दिये जायें तो पाले और ठंडी हवा के झोंको से फसल का बचाव हो सकता है।

एक वर्ष में 5690 करोड़ की 36 लघु सिंचाई योजनाएँ मंजूर

प्रदेश में एक वर्ष में 5690 करोड़ रुपये लागत की 36 लघु सिंचाई योजनाएँ (एक वृहद सिंचाई योजना) स्वीकृत कर राज्य सरकार ने खेती को समृद्ध बनाने के संकल्प को पूरा किया है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने पर 2 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इसी अवधि में 74 लघु योजनाए भी पूर्ण की गई हैं, जिनसे 26 हजार 277 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा बढ़ी है। इसके अलावा, निर्माणाधीन वृहद एवं मध्यम परियोजनाओं से लगभग 60 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा निर्मित हुई है। इसी अवधि में सी.बी.आई.बी. नई दिल्ली द्वारा प्रदेश की मोहनपुरा बहुउद्देश्यीय परियोजना को समय पर पूर्ण करने तथा निर्माण में पर्यावरण के अनुकूल सामग्री का उपयोग करने पर ’’बेस्ट कंस्ट्रक्शन एन्टिटी’’ (सर्वश्रेष्ठ निर्माण इकाई) के रूप में पुरस्कृत किया गया है।

5 साल में 12 लाख हे. में सिंचाई क्षमता का लक्ष्य

राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि सिंचाई क्षमता में अगले 5 साल में 12 लाख हेक्टेयर की वृद्धि की जाएगी। इस तरह सिंचाई की वर्तमान क्षमता 33 लाख हेक्टेयर को बढ़ाकर 45 लाख हेक्टेयर किया जाएगा। साथ ही, अगले 5 साल तक सिंचाई जल की दरों को स्थिर रखा जाएगा। राज्य सरकार ने जल उपभोक्ता संस्थाओं के निर्वाचन की अवधि को भी 2 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष किए जाने का निर्णय लिया है।

जलाशयों की पूर्ण भराव जल क्षमता अर्जित करने के लिये नई नीति

प्रदेश के जलाशयों की पूर्ण जलभराव क्षमता प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार ने नई नीति बनाई है। जलाशयों की सिल्ट एवं रेत को अलग-अलग कर सिल्ट किसानों को दी जाएगी। रेत का विक्रय कर राजस्व प्राप्त किया जाएगा। खेती के विकास के लिए सिंचाई परियोजनाओं में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने पर भी विचार किया जा रहा है।

जल क्षति रोकने के लिये नहरों की लाइनिंग

प्रदेश में किसानों की सहभागिता से मार्च 2019 की स्थिति में 2064 जल उपभोक्ता संस्थाओं के माध्यम से 24 लाख 74 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई प्रबंधन का कार्य किया जा रहा है। नवीन योजनाओं में नहरों में लाइनिंग का प्रावधान किया गया है। इससे जल की क्षति को रोकने में मदद मिलेगी। तवा एवं बारना वृहद परियोजनाओं में पिछले एक वर्ष में क्रमशः 116.34 किलोमीटर एवं 113.51 किलोमीटर लाइनिंग का कार्य किया गया है। वर्तमान ममें 114 लघु सिंचाई योजनाओं के डीपीआर तैयार करने की कार्रवाई भी जारी है।

बांधों के जल से तालाबों का भराव

प्रदेश में जल की मांग एवं बांधों में अतिरिक्त जल की उपलब्धता के आधार पर गंगा-कछार रीवा के 112 तालाबों को बाणसागर के बांध के जल से भरा जा रहा है। इसी तरह, यमुना कछार ग्वालियर के 14 तालाबों को विभिन्न नहरों से तथा टीकमगढ़ जिले में हरपुरा नहर से क्षेत्र के 10 तालाबों को भरा जा रहा है। जल संसाधन विभाग के आधिपत्य के सभी चंदेल कालीन और अन्य प्राचीन तालाबों का रख-रखाव भी नियमित रूप से किया जा रहा है। छतरपुर तथा टीकमगढ़ जिले के 30 प्राचीन तालाबों के सुधार और सुदृढ़ीकरण के प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं।

अधूरी सिंचाई योजनाओं की पूर्णता को प्राथमिकता

राज्य सरकार ने अधूरी पड़ी सिंचाई योजनाओं को पूरा करने के कार्य को प्राथमिकता दी है। प्रतिवर्ष 100 लघु सिंचाई योजनाओं को पूर्ण किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। चार वृहद और आठ मध्यम परियोजनाओं को शीघ्र पूर्ण किए जाने का लक्ष्य है। इस प्रयासों से अब वह दिन दूर नहीं, जब पूरा मध्यप्रदेश सिंचाई के मामले में पूरी तरह आत्म-निर्भर होगा।

आदिवासी संस्कृति को संरक्षण और प्रोत्साहन देने की आवश्यकता

राज्यपाल श्री टंडन द्वारा भोपाल हाट में आदि महोत्सव का शुभारंभ

राज्यपाल श्री लालजी टंडन ने भोपाल हाट में आदि महोत्सव का शुभारंभ करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति के संवाहक आदिवासी समाज की संस्कृति, कला-कौशल और ज्ञान को संरक्षण तथा प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के लिये जमीनी प्रयास जरूरी हैं। इसमें समाज की सक्रिय भागीदारी होनी चाहिए। राज्यपाल ने आदिवासी समाज के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए देश की सुरक्षा में उनकी कुर्बानियों को वंदनीय बताया। जन-जातीय कार्य मंत्री श्री ओमकार सिंह मरकाम ने शुभारंभ कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि आदिवासी समाज का प्रकृति और कृषि से गहरा रिश्ता है। यह समाज इनका सम्मान और संरक्षण करता है। आदिवासी समाज में फसल की बोनी के पहले बीज-पूजन किये जाने जैसी सांस्कृतिक परम्पराएँ हैं। श्री मरकाम ने कहा कि आदिवासी समाज के पास बहुमूल्य औषधियों और जड़ी-बूटियों को पहचानने की अद्भुत क्षमता है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा आदिवासी खाद्यान्न, कला-कौशल, संस्कृति और ज्ञान को संरक्षित करने की दिशा में प्रयास शुरू कर दिये गए हैं।

पॉक्सो एक्ट के प्रकरणों में जल्दी ट्रायल कराने की पहल करें लोक अभियोजन अधिकारी

लोक अभियोजन अधिकारी कार्यशाला में विधि-विधायी कार्य मंत्री श्री शर्मा

जनसम्पर्क तथा विधि-विधायी कार्य मंत्री श्री पी.सी. शर्मा ने पीटीआरआई में पॉक्सो एक्ट संबंधी लोक अभियोजन की विधिक कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए कहा कि पॉक्सो एक्ट के प्रकरणों में ट्रायल जल्दी करवाने की पहल किया जाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने लोक अभियोजन अधिकारियों से कहा कि डीएनए रिपोर्ट प्राप्त करने में होने वाले विलंब को कम किया जाए। श्री शर्मा ने बच्चियों से दुष्कर्म जैसे संवेदनशील मामलों में नियमित मॉनीटरिंग किये जाने और दोषियों को यथाशीघ्र सख्त सजा दिलवाने की जरूरत बताई। मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि लोक अभियोजन अधिकारियों की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि दुष्कर्म के आरोपियों के खिलाफ पीड़िता के साथ अभिभावक की तरह व्यवहार रखें, उन्हें निर्भय होकर पूरे आत्म-विश्वास के साथ गवाही देने की प्रेरणा दें। श्री शर्मा ने पॉक्सो एक्ट में कार्यवाहियों की जानकारी देते हुए कहा कि प्रदेश में 67 प्रतिशत प्रकरणों में अपराधियों को सजा दिलवाने में हम सफल हुए हैं। इस वर्ष प्रदेश में पॉक्सो एक्ट में 9 प्रकरणों में अपराधियों को फांसी की सजा दिलाई गई। मंत्री श्री शर्मा ने अधिकारियों से कहा कि अपराधियों के मन में सजा का खौफ पैदा करें।

प्रमुख सचिव गृह श्री एस.एन. मिश्रा ने कहा कि अपराधियों के मन में खासतौर पर महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वालों में खौफ बढ़े। इसके लिए ऐसे अपराधों के अधिकतम प्रकरणों में अपराधियों को सजा दिलाना जरूरी है। सरकार का पक्ष अभियोजन अधिकारी द्वारा न्यायालय के समक्ष मजबूती के साथ रखा जाना चाहिए। प्रमुख सचिव विधि श्री सत्येन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि पॉक्सो एक्ट के प्रकरणों की रोजाना की कार्रवाई की राज्य मुख्यालय पर मॉनीटरिंग की जा रही है। संचालक लोक अभियोजन श्री पुरुषोत्तम शर्मा ने पॉक्सो एक्ट संबंधी संभाग स्तरीय कार्यशालाओं के लोक अभियोजन की विस्तृत जानकारी दी।

अंतर्राष्ट्रीय वन मेले में 36 लाख से अधिक मूल्य की जड़ी-बूटियों एवं हर्बल उत्पादों की बिक्री

अकाष्ठीय वनोपज का उत्तरदायी प्रबंधन कार्यशाला सम्पन्न

अंतर्राष्ट्रीय वन मेले में चौथे दिन सुबह से ही शहर एवं आस-पास के सभी वर्ग के लोगों का भारी संख्या में आगमन प्रारम्भ हो गया। कल रविवार 22 दिसम्बर 2019 को अंतर्राष्ट्रीय वन मेला का समापन होगा। मेला समापन की अवधि जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, लोगों द्वारा इसमें मिलने वाले हर्बल उत्पादों एवं वनौषधियों की खरीदी बढ़-चढ़कर हो रही है। मेले में अब तक लगभग 36 लाख के वन एवं हर्बल उत्पादों से निर्मित औषधियों की बिक्री हो चुकी है। मेले में स्थापित 32 ओ.पी.डी. में भारी तादाद में नगर एवं आसपास के क्षेत्र के आगंतुकों द्वारा निःशुल्क चिकित्सकीय परामर्श लिया जा रहा है। यह निःशुल्क ओ.पी.डी. कल समापन तक जारी रहेगी। मेला प्रांगण में दिनांक 20.12.2019 को अकाष्ठीय वनोपज का उत्तरदायी प्रबंधनः पहुंच एवं हितलाभ साझाकरण विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के समापन सत्र में श्री ए.के. श्रीवास्तव, डायरेक्टर जनरल, एन.सी.सी.आर., डॉ. मनीष पाण्डेय, डायरेक्टर, क्वालिटी कंट्रोल ऑफ इंडिया द्वारा अकाष्ठीय वनोपजों के प्रमाणीकरण एवं उसकी प्रक्रिया तथा उसके लाभ विषय पर विस्तार से प्रस्तुतिकरण किया गया। कार्यक्रम में डॉ. राम प्रसाद सेवानिवृत्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक, प्रबंध संचालक, लघु वनोपज संघ श्री एस. के. मंडल, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, एम.एफ.पी. पार्क श्री लाल सिंह रावत एवं अपर प्रबंध संचालक श्री भागवत सिंह, श्री एच.यू. खान, श्री पुरुषोतम धीमान उपस्थित रहे। कार्यशाला के अंत में श्री लाल सिंह रावत, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, एम.एफ.पी.पार्क, लघु वनोपज संघ ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

वन मेले में आज अपरान्ह में परम्परागत जड़ी बूटियों के जानकार, वैद्य, आयुर्वेदाचार्यों का सम्मेलन प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश राज्य लघु वनोपज संघ की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। इसमें जैव-विविधता बोर्ड से डॉ. एलिज़ा थॉमस, डॉ. वकुल लाड, अपर प्रबंध संचालक, श्री भागवत सिंह उपस्थित रहे। इस बैठक में जैव विविधता समितियों की स्थापना, जैव विविधता का संरक्षण, संवर्धन विषय पर विस्तार से चर्चा की गई। वैद्य एवं आयुर्वेदाचार्यों द्वारा इस जैव-विविधता संरक्षण एवं परम्परागत ज्ञान के विकास एवं विस्तार पर विस्तृत प्रकाश डाला गया। वन मेला प्रांगण में आज आयोजित कार्यक्रमों में फैन्सी ड्रेस एंड सोलो एक्टिंग प्रतियोगिता, लोक-नृत्य (झाबुआ), कठपुतली नृत्य, रूपेश लाल का गजल गायन और अंत में रात्रि में श्री अशोक चक्रधर की अध्यक्षता में कवि सम्मेलन हुआ। मेले में उपस्थित आगंतुकों ने इन रंगारंग कार्यक्रमों का भरपूर आनंद लिया।

रविवार 22 दिसम्बर को समापन

अंतर्राष्ट्रीय वन मेला का समापन रविवार 22 दिसम्बर को होगा। समापन समारोह राज्यपाल श्री लालजी टंडन के मुख्य आतिथ्य में होगा। वन मंत्री श्री उमंग सिंघार समापन समारोह की अध्यक्षता करेंगे। राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष श्री वीरेन्द्र गिरि गोस्वामी इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि होंगे। समापन समारोह में मेले में स्टॉलों की साज-सज्जा एवं प्रस्तुतीकरण के लिये स्टॉल धारकों को पुरस्कृत भी किया जायेगा। समापन दिवस पर निःशुल्क चिकित्सा शिविर सुबह 11 से दोपहर 1.30 बजे तक तथा अपरान्ह में 4 से 7 बजे तक रहेगा।

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