हुनर- ए- CAA

CAA की आड़ में
सत्ता सुख का ख्वाब
देश जलाने का हुनर
देता शाहीन बाग

न काहू से दोस्ती
न काहू से बैर
नोट मिल रहे करने से
शाहीन बाग की सैर

क्या कहता है CAA
न जाने अंजान
कला कपट में फंस रहे
भोले भाले सुजान

कपटी जो घर घुस रहे
करें देश का घात
उन दुष्टों के वास्ते
CAA है भ्रात

कोई न खेदा जाएगा
है जिसमें ईमान
बच न कोई पाएगा
जो है बेईमान…

गर भारत के लाल हो
फिर कैसा डर यार
अगर घुसे हो घात कर
CAA भगाएगा मार….

हुनर मंद हैं देश मे
जाने सबकी करतूत
जिस थाली में खा रहे
करते उसी में छेद…

एक तीर ही तरकश से
बाहर आया यार
दुष्ट द्रोहियों में मचा
कैसा हाहाकार…

सावधान हुनर मंद CAA आ रहे हैं……

अर्चना जैन

मंडला

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