नवरात्री में संयम और साधना से मिलेगी कोरोना पर विजय – विवेक अग्निहोत्री


मरीजों की बढ़ती रफ़्तार बनी वैश्विक चिंता की वजह

राजनैतिक उथलपुथल से शुरू हुए चेत्र माह हमारे जीवन में इतनी उथलपुथल ले कर आएगा इसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. माह के पहले पखवाड़े में 10 दिनों तक चले हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद प्रदेश की 15 महीने पुरानी कांग्रेस सरकार ढह गई और मध्यप्रदेश की कमान एक बार पुनः भाजपा के हाथों आ गई. सत्ता की उठापठक के बीच ही देश में कोरोना का संकट गहराना प्रारम्भ हो गया था जिसके कारण सरकार को बड़े फैसले लेना आवश्यक हो गया तो प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश से एक दिवसीय जनता कर्फ्यू का आव्हान किया, जनता कर्फ्यू के बाद स्थानीय प्रशासन का लॉकडाउन और फिर चेत्र मास के दुसरे पखवाड़े यानि शुक्ल पक्ष से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 21 दिवसीय देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा कर दी. देशव्यापी हड़ताल और कर्फ्यू को सुनने और जानने वाले देशवासियों के लिए जनता कर्फ्यू और देशव्यापी लॉकडाउन बिलकुल नए शब्द हैं, जो कोरोना संकट के कारण उत्पन्न हुई विकट परिस्थितियों की उपज है. आज देश जिन परिस्थितियों से गुजर रहा है वो भारतीयों के जीवन का पहला अनुभव है.
इस परिस्थिति की गंभीरता को नहीं समझने वाले भी देश के कर्णधारों के माथे पर चिंता की लकीरें देख कर हतप्रभ हैं और चिंता की इन लकीरों की वजह कोरोना का विश्वव्यापी गहराता संकट है जिसे आंकड़ों से समझा जा सकता है. पहले एक लाख लोग कोरोना से संक्रमित होने में 67 दिन लगे, 2 लाख तक पंहुचने में 11 दिन और अगले चार दिन में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या तीन लाख पार कर गई. अभी बीते तीन दिनों में तो लगभग 1.20 लाख नए मरीज जुड़ गए. कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने की बढती रफ़्तार विश्वव्यापी चिंता का विषय बन चुकी है.
हालाँकि हमारे देश में अभी तक कोरोना संक्रमण नियंत्रित नजर जरूर आ रहा है पर संकट जितना नजर आ रहा है उससे कहीं ज्यादा बड़ा है. हमारे देश में शुरुआती कोरोना संक्रमित मरीज विदेश यात्री या विदेशी थे फिर जो मरीज आये वो विदेश यात्रियों से संक्रमित हुए थे और अब जो मरीज आ रहे हैं वो स्थानीय स्तर पर ही संक्रमित हुए हैं. पहले दो चरणों में मरीजों और उनके सम्पर्क में आये लोगों को चिन्हित करना और उन्हें आइसोलेट करना आसान था मगर अब जो मरीज आ रहे हैं इनके सम्पर्कित लोगों को ढूँढना और उन्हें आइसोलेट करना टेडी खीर है. आइसोलेशन के आभाव में वह संक्रमित व्यक्ति, बीमारी के लक्षण नजर आने तक किस-किसको संक्रमित कर सकता है ये अनुमान लगाना लगभग असंभव है इसलिए आज देशव्यापी लॉकडाउन कर सबको आइसोलेट करने की आवश्यकता है.
वैसे भी लॉकडाउन के प्रथम नो दिन नवरात्रि पर्व के हैं और इसका हम भारतियों के लिए विशेष धार्मिक महत्त्व है. ये नो दिन संयम और साधना के दिन हैं इसलिए इस लॉकडाउन अवधि में सपरिवार घर में रहते हुए जगत जननी माँ दुर्गा की आराधना करते हुए विश्व के कल्याण की कामना करें. यदि हम इन 9 दिन संयम और अनुशासन से व्यतीत कर पाए तो यकीन मानिये कोरोना की आपदा से देश बच जायेगा. नहीं तो लॉकडाउन में ही बात नहीं थमेगी कोरोना कहर के साथ-साथ कर्फ्यू और देखते ही गोली मारने के आदेश तक भी बात पंहुच सकती है. हम इसके संक्रमण को होने से पहले ही रोक लें तो ही बेहतर है क्योंकि इटली, अमेरिका जैसे विकसित राष्ट्र भी कोरोना के सामने असहाय नजर आ रहे हैं तो हमारे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था का आधारभूत ढांचा इसे कैसे झेल सकेगा. अब हमारे घर, परिवार और राष्ट्र के सुरक्षित भविष्य का फैसला हमारे ही हाथों हैं, मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि जगत जननी माँ जगदम्बा हम भारतीयों सहित सम्पूर्ण विश्व का कल्याण करेंगी.

विवेक अग्निहोत्री,मंडला

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