‘लॉक डाउन 2.0 के बाद,……क्या?’

प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों के बीच वीडियो कांफ्रेंसिंग बैठक से आशाओं के अनुरूप परिणाम सामने आए.जिन प्रदेशों में कोविड-19 का प्रकोप अधिक है,उनके मुख्यमंत्रियों ने लॉक डाउन की अवधि बढ़ाये जाने का प्रस्ताव दिया.वहीं अन्य प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों ने टेस्टिंग किट की कमी और वित्तीय परेशानियों की बात की.जिस तरह से कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या में बढ़ौतरी हो रही है,वह उन लोगों की चिंता भी बढ़ा रहा है,जिन्होंने कभी लॉक डाउन का मज़ाक बनाया था.वतर्मान में स्थिति यह है,कि प्रदेश सरकारें लॉक डाउन बढ़ाने की मंशा तो रखती हैं,लेकिन,अपने प्रदेश की जनता की नाराज़गी का शिकार नहीं बनना चाहतीं.इसलिए सबका प्रयास यही है,कि लॉक डाउन की अवधि बढ़ाये जाने का फ़ैसला केंद्र सरकार करे.ताकी,प्रादेशिक जनता को यह बताया जा सके,कि यह फैसला केंद्र सरकार का है,हम तो मजबूर हैं.इस तरह से केंद्र सरकार के सामने आर्थिक मदद की माँग रखने का रास्ता खुल जायेगा.प्रदेश स्तर पर चिकित्सीय सुविधाओं की कमी और केंद्र द्वारा असहयोग की बात कह कर,ठीकरा केंद्र सरकार पर फोड़ा जा सकेगा.देश की अधिकांश जनता अब भी केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकारों और जनता के प्रति जिम्मेदारियों को लेकर भ्रमित है.यही वजह है,कि नगर की अव्यवस्था के लिए भी केंद्र सरकार की कमी गिनाई जाने लगती है.22 अप्रैल के एक  दिवसीय जनता कर्फ़्यू के पश्चात जब 21 दिनों के लॉक डाउन की घोषणा की गई,तब अनेक राज्य सरकारों ने इस लॉक डाउन के महत्व को नही समझा.वो राजनीतिक वैचारिक विरोधाभास के कारण रहा हो,या अति आत्मविश्वास.परिणामतः लॉक डाउन के दौरान भी लोग पहले की भांति घूमते-फिरते रहे.संक्रमण क्रमशः फैलता रहा.जब लॉक डाउन 2.0 लागू हुआ,तो कुछ कड़ाई करने के संकेत मिले.लेकिन,लोगों की मटरगश्ती निर्बाध रूप से जारी रही.यही वजह है,कि अपेक्षानुसार परिणाम प्राप्त नहीं हुए.लॉक डाउन 2.0 अपने अंतिम चरण में है,लेकिन कोरोना वायरस नए संक्रमितों की सँख्या प्रतिदिन बढ़ते जा रही है.ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है,कि क्या केवल लॉक डाउन की अवधि बढ़ाने से इस वैश्विक महामारी पर जीत हासिल की जा सकेगी?क्योंकि,लॉक डाउन को लेकर जनता में आक्रोश झलकने लगा है.जिन नागरिकों ने ईमानदारी के साथ लॉक डाउन का पालन किया.प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन का पूरा सहयोग किया.उनकी क्या गलती है?जो लोग बेशर्मी के साथ तमाम बंदिशों की धज्जियाँ उड़ाते हुए लॉक डाउन में आम दिनों से कहीं अधिक घूम रहे हैं,ऐसे लोगों पर सख्ती क्यों नहीं की जाती.इन लोगों की बेवकूफियों से संक्रमण नियंत्रित करने में शासन प्रशासन को परेशानियां आ रही है,तो ऐसे लोगों को बख्शा क्यों जाता है?क्या,लॉक डाउन केवल उन लोगों के लिए ही है,जो देश के संविधान में विश्वास रखते हुए,हर नियम कानून का ईमानदारी के साथ निर्वहन करते आ रहे हैं.इस बारे में केंद्र सरकार और राज्य सरकार के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन को भी विचार करना पड़ेगा.नहीं तो,लॉक डाउन 2.0 के पश्चात 3.0,4.0….करते जाइए,इसका कोई अंत नहीं है.यह अंतहीन सिलसिला है.परेशानियां बढ़ते जानी हैं.

राकेश झा

सम्पादक

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