मौन ज़िन्दगी – “मदर्स डे” स्पेशल

मौन विनीता की निखरती संस्कृति ‘

क्या हुआ जो विनीता के सपनों को उड़ान न मिल पाई, उसकी बेटी तो है जिसमें जी रही है वो अपनी जिंदगी,जिसमें पल रहे उसके सपने जिन्हें वो बड़े प्यार से सवांर रही है ये कहानी है उस मां की जो न बोल पाती है न ही सुन पाती जिसने अपने बचपन को जिया तो लेकिन उन कमियों को अपनी बेटी में नहीं देखना चाहती और पल पल बेटी को नए और नायाब कलाकारी से रूबरू कराती है,कहने को तो विनीता का परिवार एक सामान्य परिवार है लेकिन कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता कि विनीता न बोल पाती है न सुन पाती,उसके घर वालों ने उसका जब ब्याह किया तो 12 साल पहले उसे पति भी ऐसे ही मिले दोनो एक जैसे लेकिन खामोशी से इशारों की भाषा एक दूसरे का खूब ख्याल रखते विनीता की सास तो उसकी तारीफ करते नहीं थकती,एक बहु एक पत्नी के रूप में उसने हर मौके पर सबका खूब ख्याल रखा और सभी से खूब स्नेह भी बटोरा विनीता और उसके पति के घर पर जब बिटिया के रुप मे फूल खिला तो उनके प्यार की बगिया महक उठी अब तो जैसे दोनो के सपनो को उड़ान मिल गयी लेकिन उन्हें क्या पता था कि संस्कृति भी उनके ही जैसी होगी।धीरे धीरे जब बिटिया बड़ी होते गयी तो वह भी न बोल पाई न सुन पाई विनीता को दुख तो हुआ लेकिन उसने हार नहीं मानी और संजो लिए वो सपने की बेटी को सामान्य बच्चो से भी ज्यादा आगे बढ़ा कर समाज को यह दिखाना है कि उनकी बेटी में भगवान ने कुछ कमी भले दे दी लेकिन ये कमी भी उनका हौसला नहीं रोक सकती,पांचवी में पढ़ने वाली संस्कृति पढ़ाई में बहुत तेज है,हर क्लॉस में अव्वल आती है इसके अलावा उसकी माँ उसे ड्राइंग पेंटिंग से लेकर घर पर ही ऐसी कलाकारी के गुर दे रही कि जिला स्तर पर उसे अब तक दर्जनों पुरूस्कार मिल चुके,इतना ही नहीं पढ़ाई लिखाई के अलावा विनीता अपनी संस्कृति को नृत्य कला में भी पारंगत कर रही है,सिलाई और पाक कला तो कब सीखा देती है किसी को पता ही नहीं चलता लेकिन जब संस्कृति ये सब करती है तो देखने वाले बस देखते रह जाते हैं।

मौन ज़िन्दगी – “मदर्स डे” स्पेशल

यह आम जिंदगी हो सकती है हर एक परिवार के लिए लेकिन विनीता उदाहरण है हर माँ के लिए जिसने अपनी जैसी ही उस बेटी के जीवन मे वो रंग भरने की कोशिश कर रही जिसके आगे सारी विवशताएँ हार जाती हैं क्योंकि इंशान मजबूर किसी कमी को लेकर हो सकता है लेकिन कला और हुनर के साथ ही पढ़ाई लिखाई के आगे किस्मत को भी उसका दरवाजा खटखटाना ही पड़ता है,विनीता की तपस्या को देख इस बात का यकीन है कि उसकी संस्कृति एक ऐसा आयाम गढ़ेगी जिस पर हर कोई चलना चाहेगा।मदर्स डे पर विनीता के साथ ही हर माँ को मीडिया टुडे शुभकामनाएं देता है क्योंकि की माँ ही तो जिसने भगवान को भी जीवन दिया और ये श्रष्टि भी उसी की देन है।

कपिल वर्मा , मीडिया टुडे

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