‘महकती रहेगी रजनीगंधा’

‘…नहीं रहे गीतकार योगेश’

एक श्रद्धांजलि…
करीब दो दशकों से खामोशी के साथ मायानगरी में अपनी खुशनुमा यादों के साथ तन्हां तन्हां जिंदगी गुजार रहे मशहूर गीतकार योगेश अब उस अनंत यात्रा पर चले गए हैं, जहां से कोई लौट कर नहीं आता। 70 के दशक में अपनी सरल, सहज अभिव्यक्तियों को गीतों में पिरो कर वाहवाही लूटने वाले इस यशस्वी गीतकार ने काल के कपाल पर बहुत कुछ ऐसा लिख छोड़ा है, जिसे सदियां गुनगुनाती रहेंगी। योगेश चले गए हैं लेकिन उनके गीत अजर हैं, अमर हैं और इन बेमिसाल गीतों के जरिए यादों के फूल, रजनीगंधा के फूल हमेशा महकते रहेंगे।       ये सच है कि योगेश को साहिल लुधियानवी, शैलेंद्र, मजरूह सुल्तानपुरी, इंदीवर या फिर आनंद बख्शी जैसी लोकप्रियता हासिल नहीं हुई लेकिन ये भी सच है कि योगेश उन अलबेले गीतकारों की सूची में शुमार किये जाएंगे जिन्होंने छोटी और एक तरह से कर्मिशयल फिल्मों के समानांतर बड़ा सामाजिक संदेश देती फिल्मों में जो लिखा, वो यादगार बन कर रह गया।
 फिल्मकार ह्रषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में बनी आनंद (1971) ने योगेश के गीतों को वो अमिट पहचान दी, जिसे आज की पीढ़ी भी सरस गुनगुनाती है और सुनना पसंद करती है।  #आनंद मौत से जूझते पुरुष पात्र की कहानी है। राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन (तब तक नवोदित की सूची में शुमार) अभिनीत यह फिल्म आज भी आंख नम कर जाती है। योगेश के लिखे कालजयी गीतों… “जिंदगी कैसी है पहेली हाय” या “कहीं दूर जब दिन ढल जाए” को सुनकर कर्म और नियति के संघर्ष की संवेदना को सहज ही स्पर्श किया जा सकता है। योगेश ने जीवन में कर्म, उत्साह, भाग्य और पीड़ा को इतने मर्मस्पर्शी अंदाज में गीतों की शक्ल दी कि ये गीत अविस्मरणीय बन कर रह गए।
     सुपरिचित फिल्मकार बासु चटर्जी की #रजनीगंधा भी योगेश के कैरियर मे मील का पत्थर साबित हुई। फिल्म के लिए लिखे “रजनीगंधा फूल तुम्हारे…” समेत अन्य सभी गीत योगेश की सबसे सुंदर रचनाएं हैं । इसी क्रम में #बासु_दा की रोमांटिक कॉमेडी “बातों-बातों में” फिल्म का शीर्षक गीत “बातों-बातों में प्यार हो जाएगा…” आज भी जब सुनते हैं तो माहौल बदल जाता है। 

योगेश के कुछ बेहद यादगार गाने..

 –आए तुम याद मुझे… गाने लगी हर धड़कन 

–बडी सूनी-सूनी है जिंदगी, यह जिंदगी         

—मैंने कहा फूलों से हसो तो वह खिलखिला के हंस दिए         

 —जिंदगी कैसी यह पहेली 

 –कहीं दूर जब दिन ढल जाए-         

–रजनीगंधा फूल तुम्हारे मेरे अनुरागी मन        

 –ना जाने क्यूं होता है यह जिंदगी के साथ          

—कई बार यूं ही देखा है, ये जो मन की सीमारेखा है…

यशपाल सिंह

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