मीडिया टुडे – समाचार

तेंदुपत्ता संग्राहक श्रमिकों का शतप्रतिशत् पंजीयन करने के निर्देश

                                             कलेक्टर डॉ. जगदीश चन्द्र जटिया ने समस्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत को मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) योजना 2018 के तहत् तेंदुपत्ता संग्राहक श्रमिकों का शतप्रतिशत् पंजीयन कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि पूर्व में योजनांतर्गत अधिकांश तेंदुपत्ता संग्राहक श्रमिकों का पंजीयन किया जा चुका है परंतु अभी भी कुछ श्रमिक पंजीयन कराने से वंचित हैं। कलेक्टर ने छूटे हुए श्रमिकों का पंजीयन कार्य चरणबद्ध तरीके से वन विभाग के मैदानी अमले के समन्वय के साथ 30 दिवस के भीतर शतप्रतिशत् रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं।

आज मनाया जायेगा विश्व तम्बाकू एवं धूम्रपान निषेध दिवस

                                             मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. श्रीनाथ सिंह ने जानकारी दी कि 31 मई को प्रतिवर्ष विश्व तम्बाकु एवं धूम्रपान निषेध दिवस के रूप में मनाया जाता है। तम्बाकु नशे की पहली सीढ़ी है। धूम्रपान एवं तम्बाकु के सेवन करने से शरीर में बीमारी से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। भारत में वर्ष 2003 में एक्ट तैयार कोटपा एक्ट के अनुसार सार्वजनिक स्थल पर धुम्रपान, तम्खाकु गुटके का सेवन, उत्पादन करने पर 200 रूपये राशि का भुगतान दण्ड के रूप में लिया जाता है। तम्बाकु जानलेवा है।

                                             विश्व में करीब 60 लाख और भारत मे 12 से 13 लाख लोगों की मृत्यु तम्बाकू के सेवन से होती है। तम्बाकु के सेवन से शरीर के हर अंग को खतरा होता है। तम्बाकु के धुयें में 4000 हजार के किस्म के रासायन होते है जिसमें से 60 तत्व कैंसर जैसे रोग उत्पन्न कर सकते हैं। तम्बाकु में मौजूद निकोटिन नशे का आदि बना देता है यह धूम्रपान के 7 सैकण्ड के अन्दर मस्तिष्क में पहुंच जाता है और फेफडो, धमनियों में मिल जाता है। तम्बाकु सेवन से होने वाली बीमारियों में कैंसर, गले, मुंह, फेफडे़, आहार नली, गुर्दा, रक्त, पेट, मूत्राशय, स्तन, लीवर और गर्भाशय, फेफडों सम्बधी रोग में फेफड़ो का सुकड़ना तथा कोशिकाओं का गांठ बनना, अस्थमा, ब्रोकाइटिस है। फेफड़ों के कैंसर से पूरे विश्व में दो तिहाई मौते हो जाती हैं। धूम्रपान से हदय तथा रक्त सम्बधी रोग में अंग का गल जाना, अपंगता आना हृदयघात, हदय शूल दर्द, रक्त वाहिका में रक्त की रूकावट, मस्तिष्क सम्बधी रोग में नशा वृत्ति, लकवा मस्तिष्क की रक्त वाहिनी में रूकावट, महिलाओं में होने वाले रोग के अंतर्गत बांझपन, गर्भपात, समय से पहले बच्चे का जन्म, कम वजन के बच्चे का जन्म, मरे हुये शिशु का जनम, शिशुओं में जन्मजात विकृति तथा पुरूषों में होने वाले रोग नपुंसकता, शुकाणुओं की कमी हो जाती है।

                                             डॉ. श्रीनाथ सिंह ने समुदाय को बताया कि तम्बाकू और धुम्रपान निषेध के लिये लोगों में जागरूकता फैलाये जिससे अपने परिवार, समाज और देश का हम भला कर सकें।

तनावग्रस्त बच्चों के लिए टेलीफोनिक हेल्पडेस्क गठित

महिला बाल विकास विभाग ने जारी किए नंबर

                                             महिला एवं बाल विकास जिला कार्यक्रम अधिकारी श्वेता तलवे से प्राप्त जानकारी अनुसार कोरोना महामारी एवं निरंतर लॉकडाउन के चलते प्रदेश के अनेक परिवारों के बच्चो में भी मानसिक तनाव, व्यग्रता आदि समस्या देखने में आ रही हैं एवं बच्चों व उनके अभिभावकों को सलाह एवं परामर्श की आवश्यकता प्रतीत हो रही हैं। उन्होंने बताया कि इस समस्या को मद्देनजर रखते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग म.प्र. द्वारा पहल करते हुये बच्चों एवं परिवारों को परामर्श देने के लिए प्रत्येक जिले में टेलीफोनिक साइको सोशल हेल्पडेस्क के अंतर्गत मंडला जिले में भी साइको सोशल काउंसलर्स का पैनल गठित किया गया है। गठित पैनल के अंतर्गत महिला एवं बाल विकास विभाग के संरक्षण अधिकारी रितेश बघेल मो.नं. 8435309646 एवं प्र.संरक्षण अधिकारी सौरभ पटवा मो.नं. 9893705043, कांउसलर चाईल्ड लाईन शिल्पा चौरसिया मो.नं. 7828225790 तथा टीम मेम्बर चाईल्ड लाईन ज्योति बरमैया मो.नं. 7000623227 को नियुक्त किया गया है। मानसिक तनाव से ग्रसित बच्चों के उचित परामर्श के लिए उक्त नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है।

लू-ताप घात से बचाव के लिये एडवायजरी जारी

                                             डॉ. श्रीनाथ सिंह ने बताया कि कोविड-19 के संक्रमण से बचने के लिये प्रशासन के द्वारा लॉकडाउन किया गया है। लॉकडाउन के दौरान घर पर रहें, आवश्यकता पड़ने पर ही बाहर जाये। वर्तमान में लू अथवा तापघात सभी उम्र के लोगों को होने की संभावना होती है। लू जानलेवा भी हो सकता है। बचाव के लिये विशेष सावधानी बरतना अहम् है। इस दौरान शिशु तथा बच्चों, 65 वर्ष से अधिक आयु के महिला, पुरूष घर के बाहर काम करने वाले एवं मानसिक रोगियों तथा उच्च रक्तचाप वाले मरीजों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है।

लू से बचने के उपाय

                                             सीधी धूप से बचें, घर के अन्दर हवादार ठंडे स्थान पर रहें। धूप में जाने से पहले सिर को छाते, कपडे अथवा टोपी से ढंके, हल्के रंग के ढीले एवं पतले वस्त्र को इस्तेमाल में लायें। कूलर अथवा एयर कंडीशनर से निकलकर एकदम बाहर ना जायें। खाली पेट बाहर जाने से परहेज करें, भोजन करके एवं पानी पीकर ही बाहर निकलें। अधिक से अधिक पेय पदार्थ जैसे नीबू पानी, लस्सी, छांछ, जलजीरा, आमपना, दही, नारियल पानी इत्यादि का सेवन करें। अल्कोहल युक्त नशीले पेय पदार्थों के सेवन से बचें, चाय, कॉफी सॉफ्ट ड्रिंक तथा ऐसे पेय पदार्थाे जिनमें शक्कर की मात्रा अधिक होती है, के सेवन से परहेज करें। फल तथा सब्जी जिनमें पानी की मात्रा अधिक होती है, विशेषकर तरबूज, खरबूजे, खीरा, संतरा, अंगूर इत्यादि का सेवन अधिक मात्रा में करें।

प्राथमिक उपचार

                                             लू से पीडित व्यक्ति को तुरंत प्राथमिक उपचार करें, शरीर का तापमान कम करने के लिये उसे ठंडे पानी से स्नान करायें अथवा शरीर पर ठंडे पानी की पट्टियाँ रखकर पूरे शरीर को ढक दें। इस प्रकिया को तब तक दोहरायें जब तक शरीर का ताप कम न हो जाये। यदि आरंभिक उपचार से मरीज ठीक नहीं होता है, तो उसे तत्काल निकट के नजदीकी स्वास्थ्य संस्था में रेफर कर उपचार लें।

लॉकडाउन अवधि में प्रदेश में 57 हजार से ज्यादा सुधारे गए हैंड पम्प

                                             प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में गर्मी के मौसम में आम लोगों को पेयजल उपलब्ध कराये जाने के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा गत दो माह में लॉकडाउन की अवधि में 57 हजार 799 हैण्डपम्पों का सुधार कार्य करवाया गया है। इसके अलावा 10 हजार 365 ऐसे हैंडपम्प जहाँ का जल स्तर नीचे चला गया था वहाँ 51893 मीटर राईजर पाइप बढ़ाकर हैण्डपम्पों को चालू कराया गया। इसके अलावा 370 बसाहटों में जहाँ हैण्डपम्पों में जल स्तर बहुत नीचे चला गया था किन्तु नलकूप में आवक क्षमता पर्याप्त थी वहाँ पर सिंगल फेस मोटर पंप को स्थापित कर ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध कराया गया है। साथ ही 532 बसाहटों में नवीन नलकूप खनन कर हैण्डपम्प स्थापित किये गये और 154 खराब हैण्डपम्प प्लेटफार्म का पुनर्निर्माण भी कराया गया। प्रमुख अभियंता श्री के.के.सोनगरिया ने बताया कि प्रदेश में 16 हजार 263 नल-जल योजनाएँ संचालित हैं। इनमें से 14 हजार 905 योजनाएँ चालू हैं। बंद नल-जल योजनाओं में से 176 योजनाओं में स्त्रोत पर ही पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। विभाग द्वारा स्थानीय ग्राम पंचायतों के सहयोग से 256 बंद नल-जल योजनाओं को चालू करवाया गया है। जबकि स्त्रोत असफल होने से विभाग ने बंद 85 योजनाओं में नवीन स्त्रोत का निर्माण कर पंचायतों के माध्यम से चालू कराया है। इस प्रकार 341 नल-जल योजनाएँ चालू की गई हैं।

अधिकतम 15 दिवस में सुधारे जाते हैं बंद हैण्डपम्प

                                             प्रमुख अभियंता ने बताया कि प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में एक लाख 28 हजार 489 ग्रामीण बसाहटों में पेयजल की व्यवस्था के लिए प्रत्येक जिले में खण्ड/उप खण्ड कार्यालय स्थापित हैं। हैण्डपम्प बिगड़ने पर विभागीय व्यवस्था के अंतर्गत सामान्य खराबी से बंद हैण्डपम्पों को 7 दिन में और विशेष खराबी से बंद हैण्डपम्पों को तकनीकी स्टाफ द्वारा अधिकतम 15 दिन में सुधार कर चालू कर दिया जाता है।

समस्या-ग्रस्त 13 हजार से अधिक बसाहटों को किया गया चिन्हांकित

                                             प्रमुख अभियंता श्री सोनगरिया ने बताया कि गर्मी के मौसम को दृष्टिगत पहले से ही संभावित पेयजल समस्या ग्रसित होने वाली 13 हजार 963 बसाहटों को चिन्हांकित कर लिया गया है। जिनकी जनसंख्या 87 लाख 51 हजार 281 है। इनमें से 4276 बसाहटों में नवीन नलकूप खनन की कार्रवाई की जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर 283 ग्रामीण नल-जल योजनाओं में पाईप लाईन बढ़ाकर पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही 4081 हैण्डपम्पों पर सिंगल मोटर पंप स्थापित किये जाने की कार्यवाही प्रचलन में है। एक हजार 733 नल-कूपों में हाईड्रोफ्रैक्चरिंग की जाएगी। इन सबके बाद भी यदि किसी बसाहट में पेयजल की उपलब्धता नहीं होने पर समीप के जल उपलब्धता वाले स्थान से परिवहन कर ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध कराया जायेगा।

पलाश और कुसुम लाख के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि

                                             मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश के पालन में राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा पलाश और कुसुम लाख के लिये निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्यों में वृद्धि की गई है। अब संग्राहकों से पलाश लाख 150 रूपये प्रति किलो के बजाय 200 रूपये प्रति किलो और कुसुम लाख 230 रूपये की जगह 275 रूपये प्रति किलो न्यूनतम समर्थन मूल्य की दर से खरीदा जायेगा। राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा संग्रहण वर्ष 2020 के लिये पुनर्निधारित दरें एवं उनमें हुई बढ़ोत्तरी इस प्रकार हैं-

क्रं लघु वनोपज पुरानी दर राशि रूपये नवीन दर राशि रूपये बढ़ोत्तरी का प्रतिशत
1. अचार गुठली 109 130 19%
2. पलाश लाख 130 200 53%
3. कुसुम लाख 203 275 35%
4. हर्रा 15 20 33%
5. बहेड़ा 17 25 47%
6. बेल गुदा 27 30 11%
7. चकोड बीज 14 20 42%
8. शहद 195 225 15%
9. महुआ फूल 30 35 16%
10. महुआ बीज 30 35 16%
11. करंज बीज 35 40 14%
12. नीम बीज 23 30 30%
13. साल बीज 20 20
14. नागरमोथा 27 35 29%

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