बाल श्रम के साथ उड़ रही सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां

कटरा क्षेत्र में अनुसंधान एवं विस्तार व्रत जबलपुर की पौधशाला का कारनाम

मंडला जिला मुख्यालय के कटरा क्षेत्र में अनुसंधान एवं विस्तार व्रत जबलपुर की पौधशाला है जहां से पूरे मंडला जिले के साथ ही दूसरे जिलों में भी पौधे वृक्षारोपण के लिए ले जाए जाते हैं और बरसात के शुरुआती सीजन में यह काम मजदूरों के माध्यम से कराया जाता है काम तो तय समय पर शुरू हो चुका है लेकिन यहां लापरवाहीयों का वह आलम है कि ऐसा लगता ही नहीं यह काम सरकारी देखरेख में हो रहा है यहां पर पेड़ पौधे उठाने का काम उन बाल श्रमिकों से करवाया जा रहा है जो आठवीं और दसवीं के छात्र हैं वह भी कटरा रोपणी के कर्मचारियों और टिकरिया क्षेत्र के एक वनरक्षक की नाक के नीचे जिन्होंने यह भी नहीं समझा कि कोरोना काल में बच्चों और बुजुर्गों को खास सावधानियां रखने की जरूरत है और वे अपने सामने ही बाल श्रम को बढ़ावा देते रहे

बाल श्रम के साथ उड़ रही सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां

जब हमने वनरक्षक मधुराज पट्टा से बात की तो उनका कहना था कि इन बच्चों के घर में कोई काम काज करने वाला नहीं है ऐसे में अगर यह काम कर रहे हैं तो इसमें बुरा क्या है वही यहाँ पर लगातार ही करीब 50 मजदूर काम कर रहे हैं जिनमें से बहुत कम मजदूरों के द्वारा ही मास्क लगाए गए हैं और सरकारी कर्मचारियों के सामने ही बिना मास्क और बिना सोशल डिस्टेंसिंग के यह असुरक्षा के बीच लगातार मजदूरी कर रहे हैं जिन्हें ना तो कोई समझाने वाला और ना ही कोई रोकने वाला नजर आया इसी दौरान इस रोपनी में सामाजिक कार्यकर्ता अनीता सोनगोत्रा पहुंची जो आई तो थी पौधे खरीदने लेकिन यहां बाल श्रम के साथ ही जो सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाने का नजारा उन्होंने देखा तो वे अपने आप को रोक नहीं पाए और बच्चों से बात करने के साथ ही श्रम विभाग के अधिकारी से उन्होंने संपर्क करने को कहा ।हालांकि हमारे द्वारा बाल श्रम होते देख लगातार श्रम विभाग के अधिकारी जितेंद्र मेश्राम को फोन लगाया गया लेकिन नवागत कलेक्टर की जॉइनिंग मैं कलेक्ट्रेट गए श्रम विभाग के अधिकारी द्वारा करीब 1 घंटे बाद हमें यह जानकारी दी गई यह कलेक्ट्रेट में है ऐसे में समझा जा सकता है कि जिन जिम्मेदारों के ऊपर जिम्मेदारी है कानूनों के पालन कराने की जब वही नियमों और कानूनों को धता बताकर सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाने के साथ ही बाल श्रम को बढ़ावा देने का काम करें ऐसे में सरकारी योजनाएं कहां जाकर फेल हो जाती हैं यह आसानी से समझा जा सकता है।

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