नटखट ‘कान्हा’ आखिर क्यों हुए ‘काले’

मंडला के आजाद वार्ड में 100 से ज्यादा साल पुराना राधा कृष्ण का मंदिर है जिसके बारे में कहा जाता है कि बैय्यो बाई नाम की एक महिला जो कहीं बाहर से मण्डला आई थी और धर्म की नगरी में ऐसी रम गई की फिर यही की होकर रह गई कृष्ण भक्त बैय्यो बाई ने एक छोटा सा मंदिर बनवाया जहां लोग हर साल कृष्ण जन्माष्टमी के दिन इकट्ठा होकर भगवान कृष्ण की पूजा अर्चना तो किया ही करते थे साथ ही गणेश उत्सव के सातवें दिन पड़ने वाली डोल ग्यारस को यहां से एक भव्य झांकी निकाली जाती थी ।

जब नर्मदा में कूदे कान्हा –

बात 1934 की है जब कृष्ण भगवान की शोभा यात्रा पूरे नगर भ्रमण करने के बाद नर्मदा नदी पहुंची तो यहां नटखट कान्हा अपने डोले से कूदकर नर्मदा नदी जहां उस समय बाढ़ आई हुई थी मैं डूब गए लोगों ने कृष्ण भगवान को और राधा जी को ढूंढने की बहुत कोशिश की लेकिन दोनों ही मूर्तियां नहीं मिली इसके बाद बैय्यो बाई ने अन्न जल त्याग दिया और प्रण किया की जब तक की भगवान कृष्ण मिल नहीं जाते वह ना तो पानी पिएंगे और ना ही अन्य का एक दाना ग्रहण करेंगी कहा जाता है कि लगभग 1 हफ्ते के बाद बैय्यो बाई को सपना आया और उन्होंने बताया कि कृष्ण भगवान ने कहा है कि मैं नर्मदा नदी में ही हूं और मुझे बाहर निकालो बैय्यो बाई के द्वारा बताए गए स्थान पर जब कुछ लोगों ने डुबकी लगाई तो जो कृष्ण भगवान लगातार ढूंढने पर नहीं मिल रहे थे तुरंत ही मिल गए जिन्हें फिर लाकर मंदिर में बैठा दिया गया लेकिन एक बात का बदलाव इसके बाद से आया अब जब भी कृष्ण भगवान की शोभा निकलती शोभायात्रा निकलती है तो उन्हें डोले से रस्सियों के सहारे बांधकर शोभायात्रा निकाली जाती है क्योंकि उनके भक्तों को यह डर है की नटखट कान्हा कहीं डोले से कूदकर भाग ना जाएं ।

क्यों इतने काले हैं कृष्णा –

यहाँ के कान्हा की अगर मूरत को देखी जाए तो इतनी काली प्रतिमा जो खूबसूरती से सराबोर है कहीं और नहीं मिलती जिसके बारे में मान्यता है कि जमुना के किनारे कान्हा अपने बाल सखा और गोपियों के साथ सबसे ज्यादा समय बिताया करते थे उसी जमुना नदी में कालिया नामक एक भयंकर नाग आ गया लोगों को खाने के लिए आतुर था ऐसे में जब नन्हे कृष्ण को इस बात की खबर लगी तो वे कालिया का मर्दन करने जमुना जी जा पहुंचे भयंकर और क्रोधित नाग ने नन्हे बालक पर बिष की बौछार कर दी और इससे कृष्ण का रंग काला हो गया जिसके बाद भगवान कृष्ण ने खेल ही खेल में कालिया नाग को मुक्ति दे दी कहा जाता है कि इस काले बिष के प्रभाव से जो कृष्ण भगवान का रंग काला हुआ था उसी की प्रतिमूर्ति इस मंदिर में है बताया जाता है कि महज दो से ढाई फीट ऊंची यह प्रतिमा जब शोभायात्रा के लिए डोले पर चढ़ाई जाती है तो उन्हें उठाने के लिए 6 से 7 लोग लगते हैं।

नटखट कान्हा आखिर क्यों हुए काले

चमत्कारी भी हैं काले कन्हाई –

शहर के लोगों का कहना है कि यह एक ऐसा चमत्कारिक मंदिर है जहां अगर सच्ची श्रद्धा के साथ कुछ भी मांगा जाए भगवान उनकी मनोकामनाएं जरूर पूरी करते हैं हर साल यहां कृष्ण जन्मोत्सव पर खास साज-सज्जा के साथ ही विशेष आयोजन होते रहे हैं लेकिन कोरोना के चलते इस साल यहां आयोजन बहुत साधारण रखा गया है लेकिन लोग अपने घरों से ही नटखट काले कन्हाई की पूजा अर्चना में किसी तरह की कोई कमी नहीं रखना चाह रहे।

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