मेरा चैनल तेरे चैनल से तेज – विवेक रंजन श्रीवास्तव

आज जब पाकिस्तान पर भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक का सीक्वेल बनाया , और हम सब व्यग्रता से रिमोट के बटन दबा दबा कर न्यूज चैनल अदल बदल कर बेचैनी से खबरें तलाशते रहे थे तभी इस महत्वपूर्ण कवरेज के बीच चैनल के वार रूम से कमर्शियल ब्रेक लेने की घोषणा हुई और षोडसी बाला ने उन्मुक्त वस्त्रो में ३० सेकेंड से कम समय  में ही नहा धोकर रेशमी जुल्फों से पानी झटकते हुये फलाने ब्रांड के साबुन से ही नहाने की कीमती सलाह दी  तब  मुझे अंदाजा हुआ कि वास्तव में खबरो का बाजार बड़ा मंहगा है .   मुझे बचपन में पढ़े महात्मा कबीर के दोहे “कबिरा खड़ा बजार में मांगे सबकी खैर” का अंतर्निहित भावार्थ भी कुछ कुछ समझ आया . मुझे यह भी ज्ञात हो सका  कि वास्तव में देश में कितने सारे न्यूज चैनल हैं जो चौबीसों घण्टे अनवरत एक दूसरे से ज्यादा तेजी से हमारे हित में खबरें प्रसारित करते रहते हैं . हर चैनल पर वार रूम स्थापित थे , हाथो में माईक लिये संवाददाता की ग्राउंड रिपोर्ट आ रही थी , और हर कोई यह क्लेम कर रहा था कि यह खबर एक्सक्लूजिव उसी चैनल पर सबसे पहले प्रसारित की जा रही है , यद्यपि पल दो पल के अंतर से हर चैनल पर वही एक सी खबरें लगातार आ रही थीं . रिटायर्ड गुमशुदा फौजी अफसरो को वार एक्सपर्ट होने का , राजनैतिज्ञो को टी वी पर देश प्रेम प्रदर्शित करने का और हम सब को सरकार को बड़ी बड़ी मुफ्त सलाह देने का सुअवसर भी इस घटना से  सुलभ हुआ  . हर जागरूख , व्हाट्स अप से लेकर फेस बुक तक अफवाह न फैलाने की विनती करने के साथ मोबाईल डाटा वार में निमग्न हो अपनी राष्ट्र भक्ति करता दीखता रहा . कई मित्रो ने तो अगले चुनावों के परिणाम ही घोषित कर दिये और किसे कितनी सीटें मिलेंगी इसके पूर्वानुमान तक लगाते दिखे.
        सूचना का महत्व नामक एक लेख मैंने पिछले दिनो किसी पत्रिका में पढ़ा था , पर उसका वास्तविक अर्थ इस घटना के बाद ही क्लियर हो सका जब मैंने इंटरनेट से पाकिस्तानी न्यूज चैनल भी देखे और उनमें वर्षो पुरानी भारतीय हवाई दुर्घटना के चित्र दिखाते हुये , पूरी बेशर्मी से भारतीय हवाई जहाज गिरा देने का सफेद झूठ सुना . इससे मुझे यह भी समझ आया कि या तो पाकिस्तानी जनता बिल्कुल बेवकूफ है , या उसे बेवकूफ समझकर ऐसी बेवकूफी करने वाली वहां की सेना , सरकार और चैनल वाले खुद को कुछ अधिक ही होशियार समझते हैं .
         टी वी समाचार जगत को उस अज्ञात महान पत्रकार का सदैव आभारी होना चाहिये जिसने  “ब्रेकिंग न्यूज” जैसी महत्वपूर्ण टैगलाईन शब्दावली का सर्वप्रथम प्रयोग किया .  चैनल कोई भी हो दस पांच मिनट में ब्रेकिंग न्यूज दिखाये बिना मानता ही नहीं . दूरदर्शन जैसा धीर गंभीर चैनल भी जो कभी ” एक आवश्यक उद्घोषणा ” के लिये तैयार रहने की हिदायत दिया करता था अब ब्रेकिंग न्यूज दिखाने लगा है .
        सच्ची ब्रेकिंग न्यूज सालो में कभी कभार ही ब्रेक हो सकती है , जैसे पाकिस्तान से अघोषित वार की इस घटना से घटी है . ब्रेकिंग न्यूज का मतलब होता है अनायास घटी घटना की सूचना .  जैसे ओसामाबिन लादेन ने ट्विन टावर तोड़े थे या अमेरिका ने लादेन को पाकिस्तान में घुसकर मार डाला था . नोट बंदी की घोषणा ने  वास्तव में ब्रेकिंग न्यूज बनाई थी . उस रात यह न्यूज ही नही कईयो का बहुत कुछ ब्रेक हो गया था . पर समाचार चैनलो की पारस्परिक प्रतिस्पर्धा ने ब्रेकिंग न्यूज जैसे सनसनी खेज मसले को भी इस हद तक डायलूट कर दिया है कि  बरसात के मौसम में भी बम्बई में बारिश ब्रेकिंग न्यूज के रूप में दिखाई जाती है . 
           फिलहाल मैं इस उत्साह में चैनल बदले जा रहा हूं कि कुछ वास्तविक ब्रेकिंग न्यूज मिले और हाफिज सईद और मसूद अजहर सरेंडर कर दें तो दुनिया को आतंक से कुछ राहत मिले .

विवेक रंजन श्रीवास्तव,जबलपुर

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