जीवन और जन्म का अस्तित्व बेटियों से ही है,दुर्गाउत्सव की थीम पर कपिल का संदेश एक दिन नहीं रोज करें बेटियों की पूजा

आलेख मयंक तिवारी कंटेंट एडिटर ईटीवी भारत के निजी विचार पर आधारित

जरूरी नहीं कि अगर कुछ समाज को संदेश देना हो तो लंबे-लंबे आलेख लिखे जाएं या फिर मंच या बैनर पोस्टर लगाकर भाषण बाजी की जाए जरूरी है अपनी बात को अपने ही माध्यम से उन लोगों तक पहुंचाना जो कि समाज के लिए संदेश बन जाए और यही कुछ किया है मंडला के ख्याति लब्ध फोटोग्राफर कपिल वर्मा ने, लोग इनकी फोटोग्राफी के कायल तो पहले से थे लेकिन अब इनके मुरीद हो गए हैं

फोटोग्राफर का संदेश –

सहस्त्रधारा की फ़ोटो से पहचान बनाने वाले और शाहस्त्रधारा की फ़ोटो को देश विदेश तक पहुँचाने वाले मण्डला जिले के मशहूर फोटोग्राफर कपिल वर्मा ने ने दुर्गा उत्सव की थीम पर फ़ोटो शूट किया है जो जम कर सोशल नेटवर्किंग साईट्स पर धमाल मचा रहा है और एक बार फिर उनके इस फ़ोटो शूट की जम कर तरीफ हो रही है।

राष्ट्रीय वर्तिका अलंकरण से सम्मानित फोटोग्राफर कपिल वर्मा की फ़ोटो के बिना कोई भी सरकारी या गैर सरकारी गैलरी जिले में पूरी नहीं कही जा सकती, सहस्त्रधारा के विह्नगम दृश्य की उनके द्वारा खींची गई फ़ोटो की 5 हज़ार से ज्यादा प्रतियां बनी और जिले के हर सरकारी,निजी कार्यालयों के साथ ही घरों की शोभा बढ़ा रही है वहीं विदेशों से भी इसके उन्हें काफी ऑर्डर मील चुके हैं,कला दीर्घा हो या फिर रजा कला वीथिका जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर भी कपिल के कैमरे से ली गईं अलग अलग तरह की फ़ोटो देखी जा सकती हैं यही वजह है कि उन्हें मण्डला में हर तरह की फ़ोटो शूट का मास्टर कहा जाता है जिन्हें शानदार फ़ोटो ग्राफी के लिए ढेरों सम्मान भी मिल चुके हैं और कपिल वर्मा की नवरात्र थीम पर किया गया फ़ोटो शूट एक बार फिर चर्चाओं में है,हाथरस के साथ ही अभी हाल में हुई महिलाओं और बेटियों के साथ घटनाओं से उद्वेलित कपिल ने अपने फोटो शूट के माध्यम से समाज को यह सन्देश देने का प्रयास किया है कि बेटियों की सिर्फ एक दिन नहीं बलिक साल भर पूजा करनी चाहिए क्योंकि बेटियाँ जीवन और जन्म के अस्तित्व हैं इसी तरह महिलाओं में दुर्गा का रूप हमेसा रहता है बस जरूरत है उसे महसूस करने की क्योंकि जब महिला खाना बनाती है तो अन्नपूर्णा,बच्चों को पढ़ाती तो सरस्वती, परिवार पर विपत्ति के समय दुर्गा तो बहु के रूप में लक्ष्मी के रूप में होती है लेकिन समाज के कुछ ऐसे तत्व हैं जो महिलाओं को वो सम्मान ही नहीं दे रहे जिसकी वो अधिकारी हैं,कपिल वर्मा ने अपने फ़ोटो शूट के माध्यम से महिलाओं और बेटियों के अलग अलग वे रूप दिखाए हैं जो दुर्गा के विभिन्न अवतारों में देखे जा सकते हैं साथ ही ये महिलाओं और बेटियों के सम्मान का नया सन्देश दे रहे हैं।

मण्डला जिले के अलावा दूसरे जिलों में भी एक फोटोग्राफर के रूप में कपिल ने खूब नाम कमाया है और समय समय पर थीम आधारित फोटोग्राफी या उनके शालाना कलेंडर का सभी को इंतजार रहता है,आदिवासी परम्पराओं पर 2020 का कलेण्डर भी इसी तरह चर्चाओं में था

कपिल वर्मा से मेरी पहचान ज्यादा पुरानी तो नहीं लेकिन महज 3 सालों में मैंने यह जाना कि वह न केवल एक बहुत अच्छा इंसान है बलिक उसकी सोच और उसकी कलाकारी उसे दूसरों से जुदा बनाती है हमेशा दूसरों की मेहनत के लिए तैयार इस कलाकार फोटोग्राफर ने एक बार फिर साबित किया है कि कुछ करने के लिए संसाधनों कि नहीं बलिक जरूरत होती है उस सोच की जिससे संसाधन अपने आप बनते जाते हैं ।

आलेख मयंक तिवारी कंटेंट एडिटर ईटीवी भारत के निजी विचार पर आधारित

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