“गणतंत्र”

लोकतंत्र में आन हमारी,तंत्र हमें अति प्यारा है
भारत का गणतंत्र विश्व में,सचमुच सबसे न्यारा है
हिम्मत,ताक़त,शौर्य विहँसते,तीन रंग हर्षाए हैं 
सम्प्रभु हम,है राज हमारा,अंतर्मन मुस्काए हैं ।

क़ुर्बानी ने नग़मे गाये,आज़ादी का वंदन है
ज़ज़्बातों की बगिया महकी,राष्ट्रधर्म -अभिनंदन है
सत्य,प्रेम और सद्भावों के,बादल तो नित छाए हैं 
सम्प्रभु हम,है राज हमारा,अंतर्मन मुस्काए हैं ।

ज्ञान और विज्ञान की गाथा,हमने अंतरिक्ष जीता
सप्त दशक का सफ़र सुहाना,हर दिन है सुख में बीता 
कला और साहित्य प्रगति के,पैमाने तो भाए हैं 
सम्प्रभु हम,है राज हमारा,अंतर्मन मुस्काए ।

शिक्षा और व्यापार विहँसते,उद्योगों की जय-जय है
अर्च व्यवस्था,रक्षा,सेना,मधुर-सुहानी इक लय है 
गंगा-जमुनी तहज़ीबें हैं,विश्वगुरू कहलाए हैं 
सम्प्रभु हम,है राज हमारा,अंतर्मन मुस्काए हैं ।

जीवन हुआ सुवासित सबका,जन-गण-मन का गान है
हमने जो पाया है उस पर,हम सबको अभिमान है
भगतसिंह,आज़ाद,राजगुरु,विजयगान में आए हैं 
सम्प्रभु हम,है राज हमारा,अंतर्मन मुस्काए हैं ।

प्रो.(डॉ.)शरद नारायण खरे
प्राध्यापक इतिहास/प्राचार्य
शासकीय जेएमसी महिला महाविद्यालय
मंडला(मप्र)-481661

प्रमाणित किया जाता है कि प्रस्तुत रचना व अप्रकाशित है -प्रो शरद नारायण खरे

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