प्रारब्ध की महत्ता – सरिता अग्निहोत्री

ज्योतिष शास्त्र में प्रारब्ध प्रबल है जो हम करके आए हैं उसका फल हमें इस जन्म में सहना है या यूं कहें कि हम पूर्व जन्म मे अच्छे या बुरे किए हैं कर्म किए हैं उसे किसी ना किसी रूप में भोगने आए हैं इसलिए समझदार व्यक्ति को यह अच्छे से समझ लेना चाहिए कि उसके साथ जो कुछ भी घटित हो रहा है उसमें उसके ही पूर्व जन्म के कर्मों का फल है जब तक आप उसको सामना नहीं करेंगे तब तक आपको इस जन्म मरण से छुटकारा भी नहीं मिलेगा अपने दैनिक जीवन में आप यह अनुभव करते हैं की राह चलते हुए कई लोग हमें बहुत अच्छे लगते हैं बिना करें कई लोग हमें अच्छे नहीं लगते यह सब हमारे पूर्व जन्म में साथ में रहने वालों में से होते हैं आपके साथ आपके मित्र और शत्रु भी सगे संबंधी जो आपके साथ अच्छा या बोरा व्यवहार कर रहे हैं यह सब भी प्रारब्ध का ही फल है इसलिए दृष्टा मात्र बनकर आप इसे देखें व सहन करने की क्षमता रखें इसी के अंतर्गत कोई व्यक्ति आपका अच्छा करता है अथवा बुरा यह सब संयोग बन जाता है

अंतिम समय में भीष्म पितामह ने श्री कृष्ण से पूछा था हे गोविंद हे माधव यह तो बताएं कि मुझे किस जन्म के कर्म से यह असहनीय पीड़ा सहना पड़ रही है शरशैया जो बाण की बनी है कारण अज्ञात है क्योंकि मैंने कई जन्मों पीछे जाकर देखा तब भी मुझे यह स्थिति परिस्थिति नहीं दिखाई दी और ना ही ऐसा कोई कर्म दिखा तब श्री कृष्ण जी कहते हैं आपको अपने और दो जन्म पूर्व जाना था जहां पर आपने एक सर्प जो कि कुछ क्षणों में मरने वाला था सड़क पर पड़ा था आपने उसे उठाकर फेंका तो वह कांटो की झाड़ी में जाकर गिरा और कुछ ही क्षण बाद उसकी मृत्यु हो गई किंतु उस क्षणों में जो असहनीय पीड़ा कांटो के द्वारा उस सर्प को हुई करोड़ों गुना वह कर्म आपके जीवन में इस तरह से उपस्थित हुआ हमारे द्वारा किसी भी जन्म में जो कर्म अच्छा या बुरा होता है उसका फल अवश्य सहन करना पड़ता है

विपरीत परिस्थितियों में लोग यह कहते हैं कि मेरे साथ ही यह सब कुछ क्यों हो रहा है जब सब अच्छा होता रहता है तब आप कभी यह नहीं कहते कि मेरे साथ ही है अच्छा क्यों हो रहा है

आप समर्थ हैं तब यह अति आवश्यक हो जाता है की आपके घर में सत्कर्म होते रहना चाहिए जब तक के घर में सत्कर्म होते रहेंगे तब तक आपके घर का कोई भी अहित नहीं कर सकता अपने सत्कर्म में लगे रहे दान पुण्य करते रहे बुजुर्गों का आदर करें उनका सत्कार करें जीव जंतु का संरक्षण करें घर से किसी को भूखा ना जाने दे गरीबों की मदद करें असहाय की सहायता करें भक्ति और जाप अपने दैनिक जीवन की दिनचर्या मैं शामिल करें पहली रोटी गाय को दें आखरी रोटी श्वान को दें चिड़ियों को दाना डालें जल का पात्र रखें मछलियों को छोटी-छोटी आटे की गोली खिलाएं अपने जीवन का हिस्सा बना ले
आपके घर में जब तक कोई पुण्य शाली व्यक्ति रहता है, तब तक आपके घर में कोई नुकसान नहीं कर सकता।
जब तक विभीषणजी लंका में रहते थे , तब तक रावण ने कितना भी पाप किया, परंतु विभीषणजी के पुण्य के कारण रावण सुखी रहा
परंतु जब विभीषण को रावण ने जैसे ही लात मारी और लंका से निकल जाने के लिए कहा, तब से रावण का विनाश होना शुरू हो गया और रावण की सोने की लंका का खत्म हो गई

इसी तरह हस्तिनापुर में जब तक विदुरजी का अपमान हुआ कौरवों ने विदुरजी का अपमान करके सभा से चले जाने के लिए तब भगवान श्री कृष्ण जी ने विदुरजी से कहा कि काका आप अभी तीर्थ यात्रा के लिए प्रस्थान करिए और भगवान के तीर्थ स्थानों पर यात्रा करिए ।
और भगवान श्री कृष्णजी ने विदुरजी को तीर्थ यात्रा के लिए भेज दिया ,और जैसे ही विदुर जी ने हस्तिनापुर को छोड़ा , कौरवों का पतन होना चालू हो गया और अंत में राज्य भी गया और कौरवों के पीछे कोई कौरवों का वंश भी नहीं बचा ।
इसी तरह हमारे परिवार में भी जब तक कोई भक्त और पुण्य शाली आत्मा होती है, तब तक हमारे घर में आनंद ही आनंद रहता है ।
इसलिए भगवान के भक्त जनों का अपमान कभी ना करें ।

हमें जो घर में सुख सुविधा एवं दो वक्त थी भोजन की व्यवस्था मिल रही है ना जाने किसके पुण्य के द्वारा मिल रही है। इसलिए हमेशा आनंद में रहें ,और कोई भक्त ,परिवार में भक्ति करता हो तो उसका अपमान ना करें, उसका सम्मान करें, और उसके मार्गदर्शन मे चलने की कोशिश करें । पता नहीं संसार की गाड़ी किस के पुण्य से चलती है
ईश्वर, शास्त्र , गुरु के प्रति समर्पित रहें। धर्म की जड़ जहाँ होगी वहाँ अशुभ कर्म आने से डरेंगे ।
माता-पिता , बड़े बुजुर्गों और अतिथि का हमेशा सम्मान करें और सद्गुरु के बताए अनुसार जीवन जियें और भगवान की भक्ति करते रहें .

सरिता अग्निहोत्री मंडला मध्य प्रदेश

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