चंद्र ग्रहण 26 मई 2021, जाने क्या कहती है आपकी राशि : सरिता अग्निहोत्री

चंद्र ग्रहण 26 मई 2021 दिन बुधवार को वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण ग्रहण लग रहा है यह पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में के कुछ हिस्सों में पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में उड़ीसा के कुछ हिस्सों में अंडमान निकोबार दीप समूह में कुछ समय के लिए दिखाई देगा यह उपछाया ग्रह है ग्रहण काल 2:17 से 7:19 तक है सूतक काल पहले से लग जाएगा इसलिए जरूरी है कि प्रत्येक जातक पर इसका प्रभाव होगा इस समय शनि वक्रि व सक्रिय हो रहे हैं अतः बीमारियां महामारी भी ज्यादा देखने मिलेगी सभी राशियों के स्वास्थ्य पर यह अपना प्रभाव छोड़ेगा खासकर खासकर मीन राशि इस पर अपना प्रभाव और भ्रामक स्थिति बनाएगा सभी राशियों के लिए हनुमान जी की पूजा राम जी की पूजा शिव अभिषेक गायत्री यज्ञ अनिवार्य रूप से करने का विधान बन रहा है साथ ही जितना हो सके दान पुण्य करके इससे कुछ अंश तक निजात मिल सकती है परंतु परंतु जिन राशियों में चंद्रमा नीच का है उस पर यह अपना प्रभाव कुछ ज्यादा ही डालेगा ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण का प्रभाव संपूर्ण पृथ्वी एवं जातकों इस पर पड़ता है इसका प्रमाण प्रासंगिक है ।ज्योतिष शास्त्र अपने आप में गूढ़ रहस्यों से परिपूर्ण है इस पर विश्वास करें या ना करें पर सावधानी जरूर रखें और ऐसे जातक जिनका चंद्रमा कमजोर है ,चंद्रमा नीच का है उनके लिए तो अति आवश्यक है कि वे सावधानी पूर्वक कार्य करें इस प्रकार समझें एक छोटा सा चंद्रमा जब समुद्र केअथाह जल को उद्वेलित कर सकता है तो मनुष्य के शरीर में जो जल है उसके ऊपर उसका प्रभाव कितना पड़ता होगा। चंद्रमा का सीधा संबंध मन से होता है। ग्रहण के समय प्रकृति में भी उथल-पुथल होती है और उन जातकों पर भी इसका प्रभाव पड़ता है दुर्घटनाएं भी होती हैं लोगों में पागलपन का दौरा भी पड़ता है क्योंकि वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का बाहुल्य होता है।ग्रहण काल में ग्रहण के समय स्वभाविक है जातकों पर इसका प्रभाव पड़ना। सूतक लगने की पहले तुलसी दल को अवश्य तोड़ ले और जल दूध खाने की खाद्य सामग्री में अवश्य इसको डाल दे तुलसी कीटाणु नाशक होती है और वह जिस चीज में डाली जाती है उसको शुद्ध करती है। 5 जून को चंद्र ग्रहण का सूतक काल 5 जून दोपहर को 1:45 से लग जाएगा सूतक काल में भगवान की मूर्ति को ढक दिया जाता है मूर्ति को छूना वर्जित रहता है गर्भवती स्त्रियां चंद्र ग्रहण में या किसी भी ग्रहण में बाहर ना निकले यह उनके लिए निषेध है बुजुर्ग बच्चे रोगी गर्भवती स्त्रियां इनके ऊपर ग्रहण काल में खाने का प्रतिबंध नहीं है तुलसी दल डालकर वे भोजन ग्रहण कर सकते हैं। ग्रहण लगने का समय चंद्र ग्रहण 5 जून दिन शुक्रवार को वर्ष का दूसरा ग्रहण लग रहा है ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण का प्रभाव संपूर्ण पृथ्वी एवं जातकों इस पर पड़ता है इसका प्रमाण प्रासंगिक है ।ज्योतिष शास्त्र अपने आप में गूढ़ रहस्यों से परिपूर्ण है इस पर विश्वास करें या ना करें पर सावधानी जरूर रखें और ऐसे जातक जिनका चंद्रमा कमजोर है ,चंद्रमा नीच का है उनके लिए तो अति आवश्यक है कि वे सावधानी पूर्वक कार्य करें इस प्रकार समझें एक छोटा सा चंद्रमा जब समुद्र केअथाह जल को उद्वेलित कर सकता है तो मनुष्य के शरीर में जो जल है उसके ऊपर उसका प्रभाव कितना पड़ता होगा। चंद्रमा का सीधा संबंध मन से होता है। ग्रहण के समय प्रकृति में भी उथल-पुथल होती है और उन जातकों पर भी इसका प्रभाव पड़ता है दुर्घटनाएं भी होती हैं लोगों में पागलपन का दौरा भी पड़ता है क्योंकि वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का बाहुल्य होता है।ग्रहण काल में ग्रहण के समय स्वभाविक है जातकों पर इसका प्रभाव पड़ना। सूतक लगने की पहले तुलसी दल को अवश्य तोड़ ले और जल दूध खाने की खाद्य सामग्री में अवश्य इसको डाल दे तुलसी कीटाणु नाशक होती है और वह जिस चीज में डाली जाती है उसको शुद्ध करती है।

सूतक काल में भगवान की मूर्ति को ढक दिया जाता है मूर्ति को छूना वर्जित रहता है गर्भवती स्त्रियां चंद्र ग्रहण में या किसी भी ग्रहण में बाहर ना निकले यह उनके लिए निषेध है बुजुर्ग बच्चे रोगी गर्भवती स्त्रियां इनके ऊपर ग्रहण काल में खाने का प्रतिबंध नहीं है तुलसी दल डालकर वे भोजन ग्रहण कर सकते हैं। कई ज्योतिषियों के मतानुसार समय में कई मिनटों का हेरफेर भी समाहित है। ग्रहण काल में क्या किया जाए ग्रहण काल में आप अपने गुरु मंत्र का जाप कर सकते हैं इष्ट देव का जाप कर सकते हैं इस देवी के जाप कर सकते हैं गणेश जी ओम गं गणपतए नमः शिवजी ओम नमः शिवाय विष्णु जी ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः हनुमान जी ओम हं हनुमते नमः राम जी ओम राम रामाय नमः और सबसे प्रमुख है गायत्री महामंत्र का जाप आप इसे किसी भी मंत्र को पढ़ने के पहले अवश्य गायत्री मंत्रपढ़ ले। ग्रहण काल में जाप का अत्यधिक महत्व है क्योंकि अगर आप 100 बार मंत्र का जाप करेंगे तो लाखों जाप का फल मिल जाएगा और हजार जाप करेंगे तो करोड़ों जाप का फल आपको मिलेगा साथ ही अगर आप इसका दशांश हवन करते हैं। तो बहुत उत्तम होगा हवन के लिए तिल, जवा, चावल ,घी गुड यह सब मिलाकर हवन करें या फिर घी और गुड़ का हवन करें, औषधि वाले हवन के लिए गुरबेल ,नीम ,नागर मोथा कपूर, लोंग , काली मिर्च ,हल्दी इसको शामिल करें । किन राशियों पर यह अपना विशेष प्रभाव पड़ेगा मेष वृषभ मिथुन सिंह सिंह कन्या मकर कुंभ राशि पर चंद्र ग्रहण अपना प्रभाव डालेंगे और सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाली राशि वृश्चिक है तो किसी पर ग्रहण लग रहा है इसलिए वृश्चिक राशि वाले जातकों को बहुत सतर्क रहने की आवश्यकता है इसी प्रकार मीन राशि वालों को भी सावधानी की आवश्यकता है वे जोखिम ना उठाएं लेन-देन से बचें जिन जातकों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर है नीच का है उनके लिए भी सावधानी आवश्यक है और वह इसलिए भी आवश्यक है कि प्रकृति अभी संयमित नहीं है प्रकृति में भी अनेकों भूचाल आ रहे हैं चक्रवाथ कोरोना वायरस तूफान भी समाहित है ऐसी विकट स्थिति में चंद्रग्रहण का प्रभाव भी हालांकि यह छाया ग्रहण है फिर भी विशेष राशि वाले जातकों पर अपना प्रभाव डालेगा डरने की आवश्यकता नहीं है सावधानी की जरूरत है क्योंकि ग्रहण काल में नकारात्मक एवं ऋणात्मक ऊर्जा का व्यापक असर रहता है। मेष राशि वाले हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ एवं गेहूं का दान करें वृषभ व तुला राशि वाले शिव जी का जाप एवं चावल का दान करें मिथुन और कन्या राशि वाले गणेश जी का जाप एवं गाय को हरा चारा खिलाएं बच्चों को बूंदी के लड्डू दें ,कर्क राशि वाले शिव जी का जाप एवं चावल का दान करें सिंह राशि वाले शिवजी या राम जी का जाप एवं गुड़ का दान करें वृश्चिक राशि वाले महामृत्युंजय का जाप चावल एवं सप्तधान्य का जरूरतमंद को देवें धनु और मीन राशि वाले गुरु मंत्र या इष्ट देव का जाप चने की दाल दान में दे दे मकर और कुंभ राशि वाले शिवजी का जाप एवं पिप्पलाद ऋषि का स्मरण करें । तेल एवं सप्तधान्य पापड़ का दान करें। एक विशेष बात कि ग्रहण काल में अगर पितृदोष घर में है उसको दूर करने का सरल उपाय मीठे चावल बनाएं इसे कौवा चिड़िया और कुत्तों को खिलाएं। ओम सोम सोमाय नमः ग्रहण काल के अंत में स्नान जरूर करें (सुबह भी कर सकते हैं ) अगर जाप करते समय आपने जो कपड़े पहने हैं पीले सफेद उनको भी दान कर दें तो अति उत्तम होगा । दान जरूरतमंद को ही देवें। ओम नमः शिवाय

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