मीडिया टुडे समाचार : मंडला

16 जून को लगाए गए 1512 कोविड टीके

सीएमएचओ कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार आम जनता को एक मार्च 2021 से कोरोना का टीका लगाया जा रहा है। टीकाकरण के लिए जिले में 16 जून को 36 केन्द्र बनाए गए। सीएमएचओ कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार पात्र हितग्राहियों को 16 जून को शाम 4 बजे तक कुल 1512 टीके लगाए गए।

जिले में आज 1 कोरोना मरीज स्वस्थ हुआ

               मरीजों के द्वारा कोरोना को हराकर स्वस्थ होने एवं घर पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है। इसी क्रम में 15 जून की शाम 4 बजे से 16 जून की शाम 4 बजे तक जिले में 1 कोरोना मरीज ने कोरोना को हराकर अपने घर लौटा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्वस्थ हुए मरीज को कोरोना से बचाव के लिए जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की समझाईश दी गई।

खाद्यान्न वितरण के लिए 16 से 20 जून तक चलेगा विशेष अभियान

कलेक्टर हर्षिका सिंह के निर्देशानुसार 16 जून से 20 जून तक विशेष अभियान संचालित कर पीडीएस, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना एवं अस्थायी पात्रता पर्चीधारियों में से शेष हितग्राहियों को राशन वितरण किया जाएगा। इस संबंध में समस्त एसडीएम, सहायक आयुक्त सहकारिता तथा सहायक, कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारियों को विशेष अभियान चलाकर शेष हितग्राहियों को उक्त समयावधि में विशेष अभियान चलाकर शत प्रतिशत वितरण कराने के निर्देश दिए गए हैं।

नैनपुर क्षेत्र के अंतर्गत समितियों में खाद एवं बीज की उपलब्धता संबंधी जानकारी

अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) नैनपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार नैनपुर तहसील अंतर्गत विभिन्न समितियों में बीज एवं खाद का भंडारण पर्याप्त मात्रा में किया जा चुका है। डी.ए.पी. की खाद की मांग अनुसार पूर्ति अतिशीघ्र व्यवस्था की जा रही है। किसानों को सलाह दी गई है कि किसान क्रेडिट कार्ड में खाद-बीज का उठाव करें एवं बीज में शासकीय अनुदान का लाभ उठाते हुए बोनी का कार्य समय पर प्रारंभ कर दें। अनुविभागीय अधिकारी राजस्व द्वारा सतत समितियों का निरीक्षण किया जाकर किसानों से अपील की गई है कि संतुलित मात्रा में खाद का प्रयोग अपने क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के मार्गदर्शन पर अधिक उत्पादन की श्रीविधि तकनीक का प्रयोग करें। ताकि अधिक से अधिक पैदावार प्राप्त की जा सके।

16 जून की स्थिति में सहकारी समिति नैनपुर में खाद के अंतर्गत यूरिया 23.7 टन, डीएपी 8.8 टन एवं पोटाश 5.5 टन तथा बीज 1010-17.60 क्वि. सहभागी 33.60 क्वि. उपलब्ध है। इसी प्रकार सहकारी समिति जामगांव में खाद के अंतर्गत यूरिया 75.0 टन, सुपर 30.0 टन एवं पोटाश 5.5 टन तथा बीज 1010-48 क्वि., 1751-33.6 क्वि. उपलब्ध है। इसी प्रकार सहकारी समिति पिंडरई में खाद के अंतर्गत यूरिया 78.0 टन एवं सुपर 74 टन तथा बीज 1010-30 क्वि. उपलब्ध है। इसी प्रकार सहकारी समिति चिरईडोंगरी में खाद के अंतर्गत यूरिया 25.6 टन, डीएपी 1.4 टन एवं सुपर 42.2 टन तथा बीज 1010-25 क्वि., जीआर 81-22 क्वि. उपलब्ध है। सहकारी समिति परसवाड़ा में खाद के अंतर्गत यूरिया 11.3 टन, डीएपी 5.3 टन एवं सुपर 45.1 टन तथा बीज 1010-10.50 क्वि. उपलब्ध है। सहकारी समिति टाटरी में खाद के अंतर्गत यूरिया 17.5 टन, डीएपी 17.6 टन एवं सुपर 50.1 टन तथा बीज 1010-25 क्वि. उपलब्ध है।

जब वर्षा चार इंच हो जाये तब किसान फसलों की बोनी करें

उपसंचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास द्वारा किसानों के लिए एडवाईजरी जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष जिले में 224.700 हजार हे. क्षेत्र में खरीफ फसलों की बोवनी होगी। इसमें सर्वाधिक धान की फसल-165 हजार हे., मक्का- 11 हजार, कोदो, कुटकी-29, उड़द-3 हजार हे., अरहर-8 हजार, रामतिल-6 हजार एवं अन्य फसल लगभग-3 हजार हे. में लगेगी। जिले में धान की बीज प्राथमिक सेवा सहकारी समितियों में भण्डार कराया जा रहा है जो किसान अपने घरू बीज का उपयोग कर रहे हैं वह बीज की साफ-सफाई, अकुंरण परीक्षण तथा बीज उपचार करके ही खेत में बोवनी करें। खेत में जैविक खाद प्रति हे. 10-12 टन की दर से डालकर खेत की अच्छी तैयारी करें साथ ही अगर नीम की नीबोली उपलब्ध है तो प्रति हे. 25 किलोग्राम की दर से खेत में डाल कर मिट्टी में मिला दें तत्पश्चात फसल की बुवाई करें। इससे दीमक, कीड़े की लारवा आदि नष्ट हो जाते हैं। जब 4 इंच की बारिश हो जाये तब बीज की बुवाई किसान को खेत में करना चाहिये, जिससे बीज का अंकुरण प्रभावित नहीं होगा और सम्पूर्ण बीज उग आयेगा। बीज दर निर्धारित मात्रा में ही उपयोग करें, जिससे फसलों को पानी, हवा, तापमान एवं पोषक तत्व के लिये प्रतिस्पर्धा करनी न पड़े और कीड़े बीमारी से प्रभावित न हो पाये। किसान फसलों के बीज में टीका लगायें इसके बाद ही खेत में बुवाई करें।

किसान बुवाई से पहले बीज का उपचार जरूर करें

उपसंचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास द्वारा बारिश के मद्देनजर किसानों के लिए एडवाईजरी जारी किया गया है। उन्होंने एडवाईजरी में किसानों से कहा कि किसान खरीफ मौसम की फसल बुवाई का समय नजदीक आ गया है। किसान अनुशंसा के अधार पर फसल के बीजों का चयन करें, जिसकी सलाह किसनों को कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र के द्वारा बतायी जाती है। यदि किसान के पास स्वयं का बीज है तो उसका अंकुरण परीक्षण कर लें। 75-80 प्रतिशत यदि बीज का अंकुरण है तभी बीज को खेत के बोनी करें। अगर किसान के पास पिछले वर्ष का हायब्रिड बीज है तो उसका उपयोग नहीं करें। उसकी जगह नयी हायब्रिड बीज खरीद कर बोनी करें। यदि आप बाहर कहीं और से बीज लाते हैं तो विश्वसनीय, विश्वासपात्र संस्था, संस्थान से बीज खरीदें, साथ ही पक्का बिल अवश्य लें एवं स्वयं उसका घर पर अंकुरण परीक्षण करें। किसान अपनी जोत के अनुसार कम से कम दो से तीन किस्मों का चयन कर बोनी करें, जिससे फसलों के नुकसान की संभावना कम रहती है।

उन्होंने कहा कि बीजोपचार हमेशा एफ.आई.आर. के क्रम में (फैजीसाईड, इंसेक्टीसाईड, राईजोबियम) करना चाहिये। इस हेतु जैविक फफूंदनाशक ट्राईकोडर्मा, बिरडी, 5 ग्राम, कि.ग्रा. बीज अथवा फफूंदनाशी थायरम कार्बाेक्सीन 3 ग्राम, कि.ग्रा. बीज या थायरम कार्बेन्डाजिम 2-3 ग्रा., कि.ग्रा. बीज के मान से उपचारित करें। बीज की बुवाई सीडड्रिल से कतार में करना चाहिये या नारी हल के द्वारा बुवाई करें। छिड़काव पद्धति से बुवाई नहीं करें, क्योंकि इसमें बीज दर अधिक लगता है, तथा कीड़े, बीमारी तथा बदरा अधिक जाता है। अतः किसान लाईन से कतार में बोनी कर अधिक उपज प्राप्त करें।

खरीफ पूर्व तैयारी शुरू करने सलाह

               उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास से प्राप्त जानकारी के अनुसार बारिश और आगामी मानसून के आगमन की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए किसान खरीफ के पूर्व तैयारी कर लें। इस साल समय पर मानसून आने की संभावना है। अतः सभी किसान खरीफ से संबंधित अपनी तैयारियों में अवश्य ध्यान दें जैसे- खेत की गहरी जुताई – उत्पादन में स्थिरता की दृष्टि से दो-तीन वर्ष में गहरी जुताई करना लाभप्रद होता है। अतः जिन किसानों ने खेत की गहरी जुताई नहीं की हो तो अवश्य कर लें। उसके बाद बक्खर, कल्टीवेटर एवं पाटा चलाकर खेत तैयार कर लें।

उन्होंने कहा कि खेत में अंतिम बखरनी से पूर्व अनुशंसित गोबर खाद 10 टन प्रति हेक्ट. या मुर्गी खाद 2.5 टन प्रति हेक्ट. की दर से डाल कर खेत में फैला लें। अच्छे उत्पादन के लिए खेत के अनुसार फसल का चुनाव करें। खेत की ऊंची, नीची और मध्यम स्थिति के अनुसार और उस क्षेत्र में लगने वाले कीट, व्याधियों को ध्यान में रखते हुए उन्नत एवं प्रतिरोधी किस्मों का चयन करें। ऊंची जमीन के लिए कम दिन में तैयार होने वाली किस्में, नीचे वाली जमीन के लिए लंबी अवधि वाली और मध्यम जमीन हेतु मध्यम अवधि के किस्मों का चयन करें। सहकारी समितियों एवं बाजार में आधार, प्रमाणित, हायब्रिड एवं उन्नत बीज उपलब्ध हैं। बीज की गुणवत्ता एक प्रमुख बिन्दु है अतः उन्नत बीज लाइसेंसधारी विक्रेता से ही क्रय करें और साथ में पक्का बिल अवश्य लें। यदि स्वयं के पास का बीज उपयोग करते हैं, तो अंकुरण परीक्षण करलें और कम से कम 75 से 80 प्रतिशत अकुंरण क्षमता वाले बीज का प्रयोग करें। बीजों को 17 प्रतिशत नमक के घोल स उपचारित करने पर कमजोर और रोगजनित बीज तैरने लगते है जिन्हें अलग कर डूबे हुये बीजों का बोनी के लिये उपयोग किया जाना चाहिये। यदि विगत वर्ष हायब्रिड बीज का उपयोग किया गया हो तो इस वर्ष उसके बीज का उपयोग न करें। नए बीज का क्रय कर उपयोग किया जाए।

उन्नत किस्मों का उपयोग

धान – जल्दी पकने वाली प्रजातियां – दन्तेश्वरी, जे.आर. -206, जे.आर.-81, सहभागी, एम.टी.यू. 1010; मध्यम अवधि वाली प्रजातियां – क्रांति, महामाया, आई.आर.-64, आई.आर.-35, पूसा बासमति-1, पूसा सुगंधा-5; देर से पकने वाली प्रजातियां – एम.टी.यू. 1001, स्वर्णा। अरहर – राजीवलोचन, आई.सी.पी.एल.-87, आशा, टी.जे.टी.-501 और राजेश्वरी। बचाव के उपाय की तर्ज पर अगर हमें फसलों को रोगों से बचाना है तो बीज को उपचारित करके काम लेना चाहिए। बीजोपचार सबसे पहले बीज को फफूंदनाशी फिर कीटनाशी और सबसे बाद में कल्चर से उपचारित करना चाहिए। इस हेतु जैविक फफूंदनाशक ट्रायकोडरमा विरडी 5 ग्राम प्रति किलो बीज अथवा थायरम $ कार्बाेक्सीन 3 ग्राम प्रति किलो बीज या थायरम $ कार्बेन्डाजिम 3 ग्राम प्रति किलो बीज के मान से उपचारित करें। विगत वर्ष धान में फॉल्स स्मट का प्रकोप अत्याधिक देखा गया था, अतः ट्राइकोडर्मा या अन्य फफूंदनाशक से बीज उपचार करने की सलाह दी जाती हैं। भूमि उपचार करने से भूमि जनित रोगो और कीटों की समस्या से छुटकारा मिल सकता है। ट्राइकोडर्मा 2.5 किलो प्रति हेक्टर को 50 किलो गोबर खाद या वर्मीकम्पोस्ट में मिलाकर मिट्टी में मिलाने की सलाह दी जाती है। धान में छिटकवां विधि से बुआई न करने की सलाह दी जाती हैं। कतार बोनी, रोपा और श्री विधि से धान की रोपाई करने से अधिक उत्पादन प्राप्त होता हैं। खरीफ सीजन हेतु उर्वरक एवं बीज आदिम जाति सेवा सहकारी समितियों और निजी विक्रेताओं के यहां भण्डारित है। किसान भाइयों से आग्रह है कि पूर्व में ही रकबे के अनुसार उर्वरक का अग्रिम भण्डारण कर ले ताकि बाद में यूरिया या अन्य उर्वरक की कमी का सामना न करना पडे़। यूरिया और डी.ए.पी. के अलावा अन्य विकल्प जैसे एन.पी.के. ओर एस.एस.पी. भी उपलब्ध है जिनका उपयोग करने की सलाह दी जाती है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड में पाये गये तत्वों की कमी या अधिकता के अनुसार अनुशंसित मात्रा में ही उर्वरक का उपयोग करें। बागवानी की खेती के लिए भी तैयारी कर लें। रोपण के लिए अंकुरित पौधों के लिए बारिश पूर्व गड्डे तैयार कर लें। रोपाई के दौरान गड्ढों को भरने हेतु गोबर खाद और उर्वरक की व्यवस्था सुनिश्चित कर लें। बारिश पूर्व जानवरों का टीकाकरण अवश्य करवा लें। टीकाकरण कराने से बीमारियों से जानवर प्रभावित नहीं होता है।

जिला स्तरीय बाढ़ आपदा प्रबधंन कंट्रोल रूम स्थापित

जिला आपदा प्रबंधन के अंतर्गत मानसून सत्र 2021 में वर्षाकाल के दौरान बाढ़, अतिवृष्टि की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने हेतु जिला स्तर पर कार्यालय कलेक्टर मण्डला के अधीक्षक कक्ष में जिला स्तरीय बाढ़ आपदा प्रबधंन कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। प्रभारी अधीक्षक भू-अभिलेख राकेश खम्परिया मो.नं. 9425359361 को कंट्रोल रूम का प्रभारी अधिकारी एवं देवेन्द्र सिंगौर, राजस्व निरीक्षक भू-अभिलेख मो.नं. 9424340912 को सहायक प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया गया है। अधीक्षक कक्ष, कार्या, कलेक्टर में जिला स्तरीय बाढ़ आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम स्थापित है। कंट्रोल रूम का दूरभाष क्रमांक 07642-251079 है।

स्थापित आपदा प्रबधंन कंट्रोल रूम सम्पूर्ण वर्षाकाल में 24 घंटे कार्यरत रहेगा जिसमें सहायक कर्मचारियों की ड्यूटी पृथक से लगाई गई है। वर्षाकाल में आपदा प्रबंधन एवं अतिवृष्टि, बाढ़ इत्यादि से संबंधित जानकारियाँ, सूचनाएँ आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम में प्राप्त की जायेगी। कंट्रोल रूम में आने वाली समस्त जानकारियों से प्रभारी अधिकारी पूर्णतः अवगत रहेंगे तथा बाढ़, वर्षा एवं क्षति से संबंधित प्रतिदिन अद्यतन जानकारी रखेगें तथा रजिस्टर संधारित करेंगे तथा यथास्थिति जानकारी उच्चाधिकारियों एवं राहत आयुक्त कार्यालय को भेजने हेतु जिम्मेदार होगें।

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