संकेतों को समझना अत्याज्य है : नरेश शर्मा

कोविड-19 की दूसरी लहर दम तोड़ रही है किंतु तीसरी लहर की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता । विभिन्न स्रोतों से प्रतिदिन विभिन्न प्रकार की अपुष्ट सूचनायें प्राप्त हो रही हैं , जैसे:-
1- हमारे देश में 67% लोग कोविड19 से संक्रमित हो चुके हैं।
2- देश की आधी से अधिक लगभग दो-तिहाईआबादी में एंटीबॉडीज़ बन चुकी हैं ।
3-बच्चों में तीसरी लहर का संक्रमण अधिक होगा अथवा नहीं होगा , इस पर विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न कयास लगाये जा रहे हैं ।
4 – भारत में कोविड-19 के संक्रमण अर्थात करोना रोग से लाखों लोगों की मृत्यु हो चुकी है ।
स्थानीय समाचार पत्रों के विभिन्न लेखों में प्रकाशित इन आँकड़ों से मैं स्वतः सहमत नही हूँ , क्योंकि ये आँकड़े अतिरेक प्रतीत होते हैं जबकि शासकीय अधिकृत आँकड़े विश्वसनीय एवम संदेह से परे, पुष्टिकारक एवम युक्तियुक्त हैं ।
डब्ल्यू.एच.ओ.( विश्व स्वास्थ्य संगठन ) ने अधिकृत रूप से कहा है कि कोविड-19 की तीसरी लहर को दृष्टिगत रखते हुए आगामी 100 से 125 दिन अति महत्वपूर्ण है । आई.सी.एम.आर. ( भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ) जो भारत की सर्वोच्च चिकित्सीय निकाय व इकाई है,ने भी इस तथ्य को स्वीकृत किया है ।हाल ही में “जीनोम सिक्वेंसिंग”द्वारा कोविड के “डेल्टा वैरीएंट”की भी पुष्टि हुई है । वैज्ञानिकों के संज्ञान में यह भी आया है कि वैक्सीन के दोनों डोज़ लगने के उपरांत भी अल्फा एवं डेल्टा दोनों प्रकार के वैरीएंट से संक्रमित होना संभव है ।
संभावित तीसरी लहर भारत मे कहर बरपा सकती है । विभिन्न धर्मों की हमारी गंगा-जमुनी संस्कृति,विभिन्न जातियों / वर्गों की सतरंगी जीवन शैली,ग्रामों में चौपाल बाजी करने की हमारी प्रवृत्ति एवं प्रतिमाह कोई न कोई धार्मिक ,सांस्कृतिक , सामाजिक , राजनैतिक आयोजन करने के हमारे आचरण के चलते भारत को नकारात्मक रूप से “सपेरों के देश ” की संज्ञा से भी अलंकृत किया गया है । आत्मीयता इतनी है हमारे समाज में,कि किसी आयोजन में किसी निकटतम व्यक्ति की अनुपस्थिति हमें “मिसिंग टाइल्स सिंड्रोम” के समान ग्रसित कर देती है । हमारी मित्रों से भेंट साधारण नहीं होती अपितु महाभारत के युद्ध के उपरांत “धृतराष्ट्र द्वारा भीम के पुतले से ली गई झप्पी” के अनुरूप होती है
हमारे यह सभी सदगुण वर्तमान में अवगुण प्रमाणित हो रहे है व संक्रमण के प्रसार हेतु उपयुक्त वातावरण निर्मित करने का कारण बन गये हैं ।
उच्चतम न्यायालय ने दिनांक 16.07.21 को उत्तर प्रदेश शासन द्वारा कावड़ यात्रा की प्रदत्त अनुमति पर पुनर्विचार करने का निर्देश देते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 में वर्णित “जीवन जीने का अधिकार” धार्मिक भावनाओं को भी आच्छादित करता है । इसके अतिरिक्त अन्य सभी जीवन को प्रभावित करने वाले कारण भी इस अधिकार के अधीन है । शीर्ष न्यायालय के इस निर्देश में यह “अनकहा कथन” है कि “आप विचार करें अन्यथा हम निर्धारित कर निर्णय ले लेंगे । ” उसी दिन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमें टेस्ट, ट्रेक, ट्रीट और टीका की रणनीति पर एकाग्रचित्त होकर तीव्र गति से आगे बढ़ना है । “माइक्रो कंटेनमेंट जोन ” पर विशेष दृष्टि रखना है । जिन जिलों में कॅरोना के अधिक प्रकरण मिल रहे हैं वहाँ गंभीरता पूर्वक ध्यान केंद्रित करना होगा। यहाँ प्रधानमंत्री का “अनकहा कथन” है कि “कॅरोना के बढ़ते मामले को लेकर मैं अत्यंत चिंतित हूँ ,आप भी संवेदनशील बने । श्री उद्धव ठाकरे ने इस बैठक में कहा कि अंतर्राज्यीय आवागमन को रोकने हेतु विस्तृत राष्ट्रीय नीति अवश्यंभावी है । उनके इस वक्तव्य में “अनकहा कथन ” यह है कि अभी भी बाहर निकलने को आतुर तथाकथित पर्यटकों हेतु “कोविड-19 आचार संहिता” की राष्ट्रीय स्तर पर बनाये जाने की आवश्यकता है । यही बात दूसरी लहर की पिक (चरम ) के समय आई.सी.एम.आर ने भी कही थी । अमेरिका ने भी विगत शनिवार को रात्रि 11:59 पर अपने टीकाकृत रहवासियों को मास्क लगाने की कड़ी चेतावनी दी है । इसमें “अनकहा कथन ” यह है कि टीकाकृत लोग बाहर घूमने की अपनी प्रसन्नता का त्याग कर अटीकाकृत लोगों में संक्रमण का प्रसार धीमा करने में सहयोग प्रदान करें ।
यह सभी अनकही बातें इस आशय का कड़ा संकेत है कि हम आगामी संभावित तीसरी लहर के निकल जाने तक आपसी मेल मिलाप को नियंत्रित करें । तब तक चौपाल बाजी , सामूहिक उत्सव एवं एकत्रित होकर प्रायः मनोरंजनार्थ किये जाने वाले “निंदा रस” के रसास्वादन जिसे सूरदास जी ने “निंदा सबल रसाद “कहा है ,से सख्त परहेज करें ।
वर्तमान में बाजारों में,धार्मिक स्थलों पर निडर विचरण किया जा रहा है, ईद-अल-अज़हा( बकरीद )पर उमड़ी भीड़ अत्यंत चिंताजनक है। श्रावण मास में हमारे अनेकानेक धार्मिक पर्व है अतः इन पर्वों पर टीकाकृत एवं गैर-टीकाकृत दोनों ही समूह के लोगों को कोविड-19 अनूकूल व्यवहार अर्थात नियमित मास्क धारण करना , परस्पर दो गज की दूरी बनाये रखना तथा निरंतर हाथ की धुलाई व सफाई ( सेनेटाइजिंग ) करने का पालन करना ही होगा । टीकाकृत जन इस भ्रम को त्याग दें कि टीका लगने के उपरांत उन्हें करोना से “अभयदान” प्राप्त हो चुका है । आई.सी.एम.आर ने स्पष्ट कहा है कि टीका मौत की आशंका , गंभीर रूप से बीमार होने व अस्पताल में भर्ती होने की संभावना को कम कर देता है किंतु संक्रमण को नहीं रोक सकता । यहाँ भी आशंका व संभावना शब्द के पीछे कुछ “अनकहा कथन” है ।
कॅरोना की दूसरी लहर के प्रचंड प्रहार के घाव अभी हरे ही हैं , वह कभी भरेंगे भी नही,अमिट हैं।अब और अधिक घाव तथा तालाबंदी सहन करने की क्षमता नहीं है हमारी। कोविड-19 अनूकूल आचरण जीवन हेतु नितांत आवश्यक हो गया है । प्रश्न है कि कब तक ? उत्तर : जब तक कोविड-19 समाप्त न हो जाये। प्रश्न : कब समाप्त होगा ? उत्तर : पता नहीं।
चाणक्य ने कहा है कि गलत दिशा में बढ़ रही भीड़ का हिस्सा बनने की अपेक्षा सही दिशा में अकेले ही चलना उपयुक्त है- इसका अनुसरण करें । संकेतों को समझें,स्वार्थी बन जायें एवं इस प्रतिकूल परिस्तिथी में अराजनीतिक भी हो जायें । इस विवाद में ना पड़े कि कोविड-19 से हमारे प्रिय जन की मृत्यु किस सरकार की त्रुटि से हुई है, ऑक्सीजन की आपूर्ति न होने ,दवाइयों की अनुपलब्धता,उपचार अभाव, आर्थिक कारणों से हुई है अथवा नही।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यह आदेशित करने पर की कॅरोना से हुई मौतों पर मुआवजा देना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है,एकाएक मौत के आंकड़े बढ़ने लगे 21 जून तक मृत्यु दर 1.30% थी जो बढ़कर अब 2.33 % हो गई है । मध्यप्रदेश में एक साथ 1478 मृत्यु संख्या आंकड़ों में जोड़ी गई तो हल्ला मच गया , बारह राज्य और है जहाँ मौत के आंकड़े चुपचाप बढ़ाए जा रहे हैं । संसद में भी यह कहा गया है कि कॅरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी के कारण कोई मृत्यु नहीं हुई है जिस पर “संसद से सड़क ” तक हर प्रान्त में बवाल मचा हुआ है अर्थात राजनीतिक तौर पर इस महामारी में मनुष्य का जीवन मात्र आँकडों में परिवर्तित हो गया है ।
अतः हमारा नैतिक दायित्व है कि जो शेष बचा है उसे संजोये रखें । अपनी व आपनों की सुरक्षा करें । हमे शीर्ष न्यायालय,संवेदनशील प्रधानमंत्री महोदय, डब्ल्यू.एच.ओ., आई.सी.एम.आर,आपदा प्रबंधन के अनकहे कथन व संकेतों को समझना ही होगा यह अपरिहार्य एवम अत्याज्य है । इसी में समाज का हित निहित है । वर्तमान परिवेष में यही राष्ट्रहित में है , राष्ट्रप्रेम और राष्ट्र भक्ति भी यही है ।

नरेश शर्मा,राज्य पुलिस सेवा,
नगर पुलिसअधीक्षक (से.नि.) जबलपुर( म.प्र.)

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