1000 वर्षों से विराजमान माँ बड़ी खेरमाई : पंडित नरेश

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आदिकाल से हमारे देश में मातृशक्ति की उपासना अत्यन्त श्रद्धा,विश्वास एवं अगाध आस्था के साथ की जा रही है । जबलपुर नगर के हृदय स्थल भानतलैया में प्रस्थापित माँ बड़ी खेरमाई मंदिर जिले का प्राचीनतम पूज्यनीय व अत्यन्त पावन स्थल है ।
यहाँ अतुल्यनीय श्रद्धा एवं भक्ति का समर्पण भाव,जीवन्त अवस्था में परीलक्षित होता है । नवरात्रि के पावन पर्व के अवसर पर मातृ उपासना अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँच जाती है।
चैत्र मास की बासंतीय नवरात्रि,अश्विन मास की शारदीय नवरात्रि में माता के उपासक यहाँ असंख्य रूप में दर्शनार्थ आते हैं । माघ एवं आषाढ़ की गुप्त नवरात्रि में भी साधक यहाँ विशेष उपासना कर सिद्धियाँ अर्जित करते हैं। इन चारों नवरात्र पर्व पर साधक की अल्प उपासना मात्र से ही उनकी मनोकामना फलित हो जाती है । माँ की स्तुति में स्वयं देवों के देव महादेव ने कहा है ~
“देवित्वम भक्त सुलभे सर्वकार्यविधायनी
कलौहि कार्य सिद्धमर्थ भूषायम ब्र्रूहि यत्न्नह ।।
असीम श्रद्धा भक्ति एवं आस्था से ओतप्रोत उपासकों के ह्रदय में यह विश्वास जीवन्त अवस्था मे विद्यमान रह्ता है कि ~
“येस्तु भक्त्या स्मृते नूनम तेषां वृद्धि प्रजायते
ते त्वाम् स्मरन्ति रक्षते तान्न संशयह।।”
बड़ीखेर माई जी के साथ ही नगर मे नवरात्रि पर्वों पर छोटी खैरमाई (ओमती ),बूढी खेरमाई (चार खंबा ), खेरमाई ( राईट टाउन स्टेडियम) एवं अनेकानेक अनगिनत माँ देवी स्थलों पर दूर-दूर तक माता के जयकारॉं तथा शंख एवं घड़ियालों की कर्ण प्रिय ध्वनि से वायुमंडल गुंजित रहता है।
लगभग 1000 वर्ष से माता बड़ी खेरमाई यहाँ विराजमान रहकर कृपा वर्षा कर रही हैं । जब जबलपुर नगर एक ग्राम था,तब माताजी ग्राम देवी के रूप में पूजित थी। मन्दिर में स्थापित मुर्ति के नीचे गर्भ गृह में शिला के रूप में माता अपने तात्कालिक मूल स्वरूप में अपनी अलौकिक एवं जनकल्याणकारी शक्ति के रूप में विद्यमान है। यह अलौकिक एवम् चमत्कारी शिला ” शाक्त एवं शैव संप्रदाय” के अनुयायियों के लिए एक सशक्त सिद्ध स्थल था । आज यह संपूर्ण सनातन धर्मावलंबियों की आस्था व विश्वास का सर्वोत्कृष्ट केंद्र है। माता खेरमाई की नयनाभिराम मुर्ति की बाईं ओर संकट मोचन दक्षिण मुखी हनुमान जी महाराज तथा दाहिनी ओर तांत्रिक शक्ति के प्रतीक “शिव रुद्र भैरव बाबा” जी की प्रस्तर मुर्ति है ।
मंदिर के प्रदक्षिणा स्थल में सन 1993 में ट्रस्ट द्वारा नव शक्तियो ~ माँ शैलपुत्री,ब्रह्मचारीणी,चंद्रघंटा,कुष्मांडा,स्कंदमाता,कात्यायनी,कालरात्रि, महागौरी एवं सिद्धिदात्री की धवल संगमरमरी देवी प्रतिमाएँ स्थापित की है । मन्दिर की प्रदक्षिणा करते हुए भक्तगण श्रद्धा-भाव से माता के इन नौ रूपों का दर्शन कर अपनी पूजन विधि को संपूर्णता प्रदान करते हैं । यह दैवीय शक्तियाँ साधकों की मनोकामना पूर्ति कर बुद्धि शक्ति तथा ऐश्वर्य प्रदान करती है । 12 माह /365 दिन माता का दरबार भक्तों से भरा रह्ता है किन्तु नवरात्री की पंचमी से नवमी तक विशेष पूजा-अर्चना एवम् महाआरती होती है । लम्बी लम्बी कतारों में देर रात्रि से भक्तों द्वारा जल धारण की प्रक्रिया की जाती है। व्यवस्था हेतु जिला पुलिस द्वारा मन्दिर प्रांगण मे अस्थाई थाना संचालित किया जाता है।
दुर्गा सप्तशती में अर्थ,धर्म,काम, मोक्ष प्रदान करने वाले ” 700 सिद्ध मंत्र श्लोक” हैं व माता के शौर्य वर्णन, उपासना,वंदना,वैभव के तेरह कल्याणकारी अध्याय भी है , इनका सम्पुर्ण पाठ ( चंडी पाठ ) भी नियमित रुप से मन्दिर मे किया जाता है ।
गर्भ गृह के समक्ष एक बड़ा कक्ष है जिसमें हवन पूजन,यज्ञ व वैवाहिक कार्यक्रमों की निरंतरता बनी रहती है। इसके निकट ही नवीन यज्ञशाला भी निर्मित हो चुकी है । मन्दिर परकोटा के दाहिने भाग में दुल्हा देव एवं बाएं भाग में ओरछा राज के पूर्व दीवान हरदौल जी की मूर्ति स्थापित है। इन दोनों मूर्तियों हेतु मंदिर निर्माण भी ट्रस्ट की योजना अंतर्गत है । मुख्य मंदिर के अलावा चारों ओर 23 प्राचीन मंदिरों की श्रंखला है । इसमें प्रमुख रुप से सिद्धि दाता गणेश,संकट मोचन हनुमान, बंजारी माता, काली माई,भैरव,सिंह वाहिनी दुर्गा,चौसठ योगिनी मंदिर सम्मिलित है। श्री राम-सीता व श्री राधा-कृष्ण की मनोहारी मूर्तियों के सुंदर मंदिरों का भी निर्माण परिसर में हो चुका है ।
मंदिर प्रांगण में सैकड़ो वर्ष प्राचीन सिद्धि दाता पीपल वृक्ष है, जिसकी परिक्रमा मनवांछित फल प्रदान करती है । मन्दिर परिसर में प्रचीन तीन बावलियाँ जलपूर्ति का साधन हैं व लगभग 100 वर्ष पूर्व निर्मित एक अखाड़ा भी है । मंदिर प्रांगण में प्रवेश हेतु तीन प्रवेश द्वार हैं। इन द्वारों से नगर व प्रान्त के दूर-दराज नगरीय एवं ग्रमीण क्षेत्रों के धर्म परायण भक्तजन ” दंड भरते, लोटते, बाजे-गाजे के साथ नाचते-गाते” मंदिर मे आते हैं । भक्त जनों द्वारा माता की जय जयकार के उदघोष से तथा लोकगीतों से उत्पन्न कर्णप्रिय ध्वनि से मंदिर प्रांगण सदैव गुंजायमान रहता है । यहाँ शक्ति के तीनों रूपों महाकाली,महालक्ष्मी,महा सरस्वती की उपासना की जाती है~ ” महाविद्या,महावाणी भारती वाक सरस्वती।”
आर्या बृहम्णी काम धेनुरवेद गर्भा वधीश्वरी ।।
25 वर्षों तक बेलबाग, कोतवाली,लॉर्डगंज,घमापुर के निरीक्षक थाना प्रभारी व उप पुलिस अधीक्षक की पदस्थापना के दायित्व का निर्वाह करते हुए मुझे नवरात्रि पर्व एवं उसके उपरांत भव्य जवारा चल समारोहों के साक्षी होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। जवारा चल समारोह में महिलाएं भाव खेलते हुए चलती हैं,अनेक साधक गले, कण्ठ, छाती, जिव्हा,कर्ण,नासिका व दोनों हाथ की बाजूओं में बाना भेदे भाव खेलते अपनी कठोर साधना का प्रदर्शन करते हैं। चल समारोह के यह दृश्य अत्यंत भावविव्हल करते हुए श्रद्धा का पवित्र वातावरण निर्मित करते हैं ।
शासकीय अभिलेख वर्ष 1921-24 के अनुसार विगत 102 वर्षों से खैरमाई मंदिर मंदिर ट्रस्ट की देखरेख में है। वर्तमान मे मंदिर के विकास कार्य निरंतर प्रगति पर है । संगमरमर की शिल्प कला में दक्ष जयपुर के शिल्पियों द्वारा मंदिर को विकसित एवं सुंदर मनोहरी रूप प्रदान किया गया है । बड़ी खेरमाई मंदिर का महाकौशल क्षेत्र के सुप्रसिद्ध तीर्थ स्थलों में महत्वपूर्ण एवं अग्रणी स्थान है । इसका श्रेय अनेकानेक श्रद्धालुओं सक्रिय भक्तों, ट्रस्ट के पदाधिकारी को जाता है । विकास के इस महान कार्य में देवी उपासक भक्तजनों का भरपूर सहयोग प्राप्त हो रहा है । स्व.पं.आदर्श मुनी त्रिवेदी एवं स्व.प्रोफेसर पं.दीनानाथ मिश्रा इस पवित्र कार्य हेतु सदैव स्मरणीय रहेंगे । वर्तमान अध्यक्ष श्री शरद अग्रवाल भी निरंतर सेवा भाव से विकास हेतु संकल्पित हैं व साधुवाद के पात्र हैं ।
मारकंडे एवम् हरिवंश पुराण में शक्ति की प्रतीक माता ने स्वयं कहा है~ ” मैं स्वयं समस्त जगत की ईश्वरी हूँ । मैं ही धन की दात्री हूँ। उपास्य तत्वों में मैं श्रेष्ठ हुँ। मैं ही एकमात्र उपास्य हूँ“।
माँ के दरबार में भक्तजनों की सदैव यही प्रार्थना रहती है~
देही सौभाग्य,आरोग्यं देही में परम सुखम
रूपम देही,जयम देही, यशो देहि,द्विषो जहि।।”
मां मुझे सौभाग्य व आरोग्य दो, परम सुख दो,रूप दो,जय दो,यश दो एवं मुझे काम क्रोध आदि मनोविकारों से मुक्ति दो। प्रार्थना से भक्तों को मन वांछित फल प्राप्त होते हैं।
( वांछित माहिती विभिन्न स्त्रोतों से साभार संकलित )
जय माँ दुर्गा,जय माँ तारा ~ दयामयी कल्याण करो“।

पं.नरेश शर्मा,राज्य पुलिस सेवा से.नि.नगर पुलिस अधीक्षक
जबलपुर ( म.प्र.)

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